मणिपुर में सुरक्षा और राजनीति पर केंद्र का सख्त रुख, राष्ट्रपति शासन के बीच हालात सुधारने की कोशिश

 

न्यूज़ डेस्क | इम्फाल

उत्तर-पूर्व भारत के संवेदनशील राज्य मणिपुर में जारी राजनीतिक और सामाजिक संकट को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और हिंसा प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हाल के दिनों में चुराचांदपुर, कांगपोकपी और इंफाल घाटी के कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाए गए हैं।

केंद्र सरकार का कहना है कि मणिपुर में लंबे समय से चल रहे जातीय तनाव और हिंसा ने न केवल कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी गंभीर असर डाला है। इसी कारण राष्ट्रपति शासन के दौरान प्रशासनिक फैसले सीधे केंद्र के नियंत्रण में लिए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, राज्य में शांति बहाल करना फिलहाल सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राजनीतिक स्तर पर भी मणिपुर को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की विफलता के कारण हालात बिगड़े, वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि स्थिति बेहद जटिल थी और केंद्र के हस्तक्षेप से ही स्थिरता संभव है। इस बीच, स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग तेज कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर की स्थिति उत्तर-पूर्व की राजनीति के लिए एक बड़ा संकेत है। यदि यहां शांति स्थापित होती है तो इसका सकारात्मक असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होते ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से पूरी तरह लागू किया जाएगा।

कुल मिलाकर, मणिपुर इस समय उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति का केंद्र बना हुआ है, जहां सुरक्षा, प्रशासन और राजनीतिक संतुलन—तीनों की कड़ी परीक्षा हो रही है।

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