न्यूयॉर्क | शनिवार, 17 जनवरी 2026
संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस ने अपने 2026 के प्राथमिकताओं वाले वार्षिक संबोधन में विश्व के वर्तमान हालातों पर एक बेहद गंभीर और चिंताजनक तस्वीर पेश की है। उन्होंने वैश्विक नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि दुनिया इस समय "अराजकता (Chaos)" के दौर से गुजर रही है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव डगमगा रही है। गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि जब दुनिया को एकजुटता की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब राष्ट्र सबसे अधिक विभाजित नजर आ रहे हैं।
सैन्य खर्च में ऐतिहासिक वृद्धि: $2.7 ट्रिलियन का आँकड़ा
महासचिव ने एक चौंकाने वाला डेटा साझा करते हुए बताया कि वैश्विक सैन्य खर्च अब बढ़कर $2.7 ट्रिलियन (लगभग 225 लाख करोड़ रुपये) के पार पहुँच गया है। यह वैश्विक विकास सहायता (Development Aid) से 13 गुना अधिक है।
यह विरोधाभास है कि हम विनाश के हथियारों पर खरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, जबकि मानवीय सहायता और गरीबी उन्मूलन के लिए संसाधन निरंतर घट रहे हैं। — अंटोनियो गुटेरेस
भाषण के 5 प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
- बहुपक्षवाद पर खतरा: गुटेरेस ने कहा कि कुछ ताकतें अंतरराष्ट्रीय सहयोग को "डेथ वॉच" (अंतिम घड़ी) पर रखना चाहती हैं। उन्होंने बहुपक्षवाद (Multilateralism) को बचाने के लिए 'UN80' पहल पर जोर दिया।
- डिजिटल और एआई का दुरुपयोग: उन्होंने चेतावनी दी कि गलत सूचना (Misinformation) और एआई (AI) एल्गोरिदम के जरिए वैश्विक विमर्श को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं।
- जलवायु संकट की उपेक्षा: महासचिव ने 'Runaway Climate Change' (बेकाबू जलवायु परिवर्तन) के प्रति आगाह करते हुए कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी पर्यावरण संकट को और भयावह बना रही है।
- अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन: गाजा, यूक्रेन, सूडान और म्यांमार जैसे संघर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन अब "स्वेच्छा" का विषय बन गया है, जो बेहद खतरनाक है।
- वैश्विक संस्थानों में सुधार: उन्होंने 1945 के दौर के बने संस्थानों (जैसे सुरक्षा परिषद) को 2026 की समस्याओं के समाधान के लिए अपर्याप्त बताया और तत्काल सुधारों की मांग की।
विशेष विश्लेषण: 1945 के समाधान से 2026 की समस्याएँ हल नहीं होंगी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुटेरेस का यह भाषण उनके कार्यकाल के अंतिम वर्ष (2026) का सबसे कड़ा संदेश है। उन्होंने सीधे तौर पर शक्तिशाली देशों को निशाने पर लिया जो अपनी "विशेषाधिकारों की राजनीति" के कारण वैश्विक शांति को दांव पर लगा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि "शांति का अर्थ केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है," बल्कि गरीबी, असमानता और अन्याय को खत्म करना ही वास्तविक शांति है।
निष्कर्ष और आगे की राह
महासचिव ने अपने संबोधन का समापन एक उम्मीद के साथ किया। उन्होंने अपील की कि यदि विश्व के नेता "लोग और ग्रह" (People and Planet) को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखें, तो अभी भी स्थिति को संभाला जा सकता है। उन्होंने युवा पीढ़ी और नागरिक समाज से आह्वान किया कि वे अपनी सरकारों पर वैश्विक सहयोग के लिए दबाव बनाएँ।
संक्षेप में:
- सैन्य बजट: विनाश पर खर्च $2.7 ट्रिलियन पहुँचा।
- संकट: जलवायु, युद्ध और गलत सूचना ने दुनिया को घेरा।
- सुझाव: संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में बड़े बदलाव की ज़रूरत।
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