मुंबई
डेस्क
| एक्सक्लूसिव
रिपोर्ट
वसई–विरार महानगर पालिका सहित महाराष्ट्र में जहाँ-जहाँ नगर निगम चुनाव होने जा रहे हैं,
वहाँ की राजनीतिक तस्वीर
अब पूरी तरह साफ़ होती नज़र आ रही है।
ज़मीनी स्तर की गणना, मतदाताओं
की नब्ज़ और मौजूदा माहौल
का गहराई से विश्लेषण यह
साफ़ संकेत दे रहा है
कि भारतीय
जनता
पार्टी
(BJP) और
उसके सहयोगी दलों के सामने फिलहाल
कोई भी विपक्षी ताक़त
टिकती नज़र नहीं आ रही।
इस
चुनाव की सबसे बड़ी
और निर्णायक ताक़त है BJP, श्रमजीवी
संगठन,
शिवसेना
(शिंदे
गुट)
और
आगरी
सेना
का
मज़बूत
गठबंधन। यह केवल
चुनावी तालमेल नहीं, बल्कि ज़मीनी समाजशास्त्र, वर्गीय समर्थन और क्षेत्रीय पकड़
का ऐसा मजबूत फॉर्मूला है, जिसने विपक्ष की रणनीतियों को
पूरी तरह बेअसर कर दिया है।
वसई–विरार बना गठबंधन की ताक़त का
केंद्र
खासतौर
पर वसई–विरार
महानगर
पालिका
में यह गठबंधन पूरी
ताक़त के साथ मैदान
में उतरा है। शहरी मध्यम वर्ग, श्रमिक तबका, पारंपरिक मराठी वोट बैंक और आगरी समाज—सभी का समर्थन एकजुट
होकर इस गठबंधन के
पक्ष में जाता दिख रहा है। यही वजह है कि यहाँ
विपक्षी दल न तो
मुद्दा खड़ा कर पा रहे
हैं और न ही
जनता के बीच भरोसा
बना पा रहे हैं।
राजनीतिक
गलियारों में साफ़ चर्चा है कि वसई–विरार में इस बार चुनाव
एकतरफ़ा
मुकाबले
की ओर बढ़ रहा
है।
प्रभाग
27: जहाँ से जीत की
आवाज़ सबसे तेज़
इस
पूरे चुनावी परिदृश्य में प्रभाग
क्रमांक
27 सबसे
ज़्यादा चर्चा में है। ज़मीनी हालात बता रहे हैं कि यहाँ सिर्फ़
बदलाव की बात नहीं
हो रही, बल्कि गठबंधन
के
पक्ष
में
मज़बूत
मतदान
का
माहौल
बन चुका है। जनता का मूड साफ़
है—भावनाओं से नहीं, बल्कि
काम, भरोसे और स्थिर नेतृत्व
के साथ खड़े रहना है।
प्रभाग
27 में बीजेपी के उम्मीदवार
प्रभाग
क्रमांक 27 में बीजेपी ने चारों सीटों
पर ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं, जो न केवल
सक्रिय हैं बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में मज़बूत पकड़ रखते हैं:
·
27
(अ)
– सौ. दयमंती भीमराव भोईर
·
27
(ब)
– श्री राजेंद्र यादव म्हात्रे
·
27
(क)
– सौ. हर्षला प्रवीण गावड़े
·
27
(ड)
– श्री धीरेंद्र कुलकर्णी
स्थानीय
राजनीतिक जानकारों का साफ़ कहना
है कि चारों उम्मीदवार
मज़बूत
स्थिति
में
हैं। इनके पक्ष में गठबंधन की पूरी मशीनरी,
ज़मीनी कार्यकर्ता और सामाजिक समर्थन
एकजुट होकर काम कर रहा है।
यही कारण है कि प्रभाग
27 को इस चुनाव में
गठबंधन
की
जीत
की
रीढ़
माना जा रहा है।
हर
जीत के बाद EVM का
राग क्यों?
जब-जब BJP और उसका गठबंधन
मज़बूत स्थिति में आता है, विपक्ष की ओर से
EVM हैक
होने
जैसे
आरोप
लगाए जाने लगते हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
श्रमजीवी
संगठन का अनुशासित श्रमिक
वर्ग, शिवसेना (शिंदे गुट) का पारंपरिक समर्थक
आधार और आगरी सेना
का क्षेत्रीय प्रभाव—ये सभी वोट
बैंक चुपचाप
लेकिन
निर्णायक
तरीके
से
गठबंधन के खाते में
जाते हैं।
निष्कर्ष:
मुकाबला नहीं, सिर्फ़ फैसला बाकी
वसई–विरार और खासकर प्रभाग 27, इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि इस बार चुनाव में लड़ाई नहीं, सिर्फ़ नतीजे का इंतज़ार बाकी है।
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