महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026
29 नगर निगमों के नतीजे घोषित, महायुति का शहरी महाराष्ट्र पर दबदबा
मुंबई | विशेष संवाददाता
महाराष्ट्र में लंबे इंतज़ार के बाद हुए नगर निगम चुनावों की मतगणना 16 जनवरी 2026 को पूरी हो चुकी है। राज्य के 29 नगर निगमों के अंतिम परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। नतीजों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने शहरी राजनीति में स्पष्ट बढ़त बनाते हुए अधिकांश नगर निगमों में सत्ता हासिल की है, जबकि महा विकास आघाड़ी (MVA) को कई पारंपरिक गढ़ों में झटका लगा है।
राज्यव्यापी तस्वीर
29 में से:
- महायुति (BJP + शिवसेना शिंदे + NCP अजित पवार) ने बहुमत नगर निगमों में जीत दर्ज की
- MVA (शिवसेना UBT + कांग्रेस + NCP शरद पवार) सीमित नगर निगमों तक सिमट गई
- AIMIM, VBA और स्थानीय दलों ने चुनिंदा शहरों में निर्णायक भूमिका निभाई
यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि शिवसेना और एनसीपी के विभाजन के बाद यह पहला पूर्ण शहरी जनादेश है।
संभागवार नगर निगम परिणाम
मुंबई संभाग (कोंकण)
मुंबई (BMC):
राज्य की सबसे अमीर नगर पालिका में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। शिवसेना के विभाजन का सीधा असर यहां दिखा और UBT गुट पिछली स्थिति दोहराने में असफल रहा। महायुति को BMC में स्पष्ट बढ़त मिली।
ठाणे, कल्याण–डोंबिवली, मीरा–भायंदर:
इन निगमों में शिंदे गुट और भाजपा का संयुक्त प्रभाव साफ नजर आया। ठाणे में सत्ता परिवर्तन ने संकेत दिया कि पारंपरिक शिवसेना वोट बैंक अब पूरी तरह एकजुट नहीं है।
नवी मुंबई, पनवेल:
एनसीपी के पुराने प्रभाव वाले इन इलाकों में अजित पवार गुट को बढ़त मिली, जिससे शरद पवार गुट को बड़ा नुकसान हुआ।
वसई–विरार:
यहां बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) ने एक बार फिर अपनी पकड़ साबित की, हालांकि भाजपा ने सीटें बढ़ाईं।
पश्चिम महाराष्ट्र
पुणे और पिंपरी–चिंचवड़:
भाजपा ने यहां अपना दबदबा बरकरार रखा। दोनों नगर निगमों में पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिला, जबकि कांग्रेस–एनसीपी गठबंधन असरदार चुनौती नहीं दे सका।
कोल्हापुर, सांगली–मिरज–कुपवाड, सोलापुर:
इन क्षेत्रों में कांग्रेस और शरद पवार गुट का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन बहुमत के लिए पर्याप्त नहीं।
विदर्भ
नागपुर:
भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज कर अपने सबसे मजबूत किले को और मजबूत किया।
अमरावती, चंद्रपुर, यवतमाल:
कांग्रेस ने मुकाबला जरूर दिया, लेकिन भाजपा यहां भी बढ़त लेने में सफल रही।
अकोला:
यहां VBA और अन्य दलों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया।
मराठवाड़ा
छत्रपति संभाजीनगर:
UBT शिवसेना ने सम्मानजनक प्रदर्शन किया, लेकिन बहुमत से दूर रही।
नांदेड़, लातूर, परभणी:
कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों में सेंध लगाते हुए भाजपा–महायुति आगे निकली।
मालेगांव:
AIMIM ने अपना दबदबा बनाए रखा।
उत्तर महाराष्ट्र
नासिक, जलगांव:
भाजपा और शिंदे गुट का मजबूत प्रदर्शन।
धुले:
कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा, लेकिन अंतिम जीत महायुति के खाते में गई।
प्रमुख कारण (Analysis)
- पार्टी विभाजन: शिवसेना और एनसीपी का टूटना MVA के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हुआ
- शहरी मुद्दे: बुनियादी ढांचा, ट्रैफिक, पानी और रोजगार पर भाजपा का फोकस
- संगठनात्मक ताकत: भाजपा का कैडर आधारित चुनाव अभियान
- स्थानीय दलों की भूमिका: कुछ शहरों में सत्ता संतुलन बदला
निष्कर्ष
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026 ने यह साफ कर दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में सत्ता की धुरी अब महायुति के हाथों में है।
BMC, पुणे और नागपुर जैसे बड़े नगर निगमों में जीत ने भाजपा को आगामी विधानसभा और लोकसभा राजनीति के लिए मजबूत आधार दे दिया है, जबकि MVA को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है।
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