नई दिल्ली/मुंबई | 17 जनवरी, 2026
महाराष्ट्र के 'मिनी विधानसभा' कहे जाने वाले नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने राज्य और केंद्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। 29 महानगर पालिकाओं के कल (16 जनवरी) घोषित हुए नतीजों में भाजपा-शिंदे-अजित पवार (महायुति) गठबंधन ने क्लीन स्वीप करते हुए विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया है।
हेडलाइंस:
- भगवामय हुआ महाराष्ट्र: 29 में से 25 नगर निगमों पर महायुति का कब्जा।
- BMC में ऐतिहासिक उलटफेर: दशकों बाद उद्धव गुट के हाथ से निकली मुंबई की सत्ता।
- पीएम मोदी की प्रतिक्रिया: "जनता ने 'डबल इंजन' सरकार की नीतियों पर लगाई मुहर।"
- विपक्ष पस्त: कांग्रेस और शिवसेना (UBT) को शहरी इलाकों में बड़ा झटका।
पीएम मोदी और केंद्र सरकार का बड़ा बयान
परिणामों के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर महाराष्ट्र की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के शहरी मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल विकास और सुशासन की राजनीति चाहते हैं। यह जीत हमारी जनकल्याणकारी योजनाओं और विकसित भारत के संकल्प की जीत है।" गृह मंत्री अमित शाह ने इसे "नकारात्मक राजनीति का अंत" करार दिया। दिल्ली में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार इन नतीजों को अपनी योजनाओं (जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और लाड़की बहिन योजना) के सफल कार्यान्वयन के रूप में देख रही है।
चुनावी विश्लेषण: मुख्य आंकड़े
चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, गठबंधन की स्थिति इस प्रकार है:
| गठबंधन/पार्टी | कुल सीटें (2,869 में से) | वर्चस्व वाले शहर |
| महायुति (BJP+) | 1,850+ | मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई |
| महाविकास अघाड़ी (MVA) | 640+ | कोल्हापुर, लातूर, सोलापुर (कुछ वार्ड) |
| अन्य/निर्दलीय | 379 | संभाजीनगर, अमरावती |
मुंबई (BMC) का संग्राम
सबसे बड़ी खबर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) से आई है। कुल 227 सीटों में से भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने मिलकर 118 सीटों पर जीत हासिल की है, जो बहुमत के आंकड़े (114) से अधिक है। शिवसेना (UBT) केवल 52 सीटों पर सिमट कर रह गई है, जो उनके राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
विपक्ष की चुनौती
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और उद्धव ठाकरे ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि वे जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों का भारी दुरुपयोग किया गया। विपक्ष अब आने वाले विधानसभा सत्र में इस हार के कारणों और चुनावी प्रक्रिया पर चर्चा करने की योजना बना रहा है।
संपादकीय टिप्पणी: इन नतीजों ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महायुति के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, जबकि विपक्ष के लिए अस्तित्व बचाने की बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।
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