न्यूज़ डेस्क | गुवाहाटी
असम में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के दौरों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि भाजपा असम को उत्तर-पूर्व की राजनीति का मजबूत केंद्र बनाए रखना चाहती है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार विकास और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में असम ने बुनियादी ढांचे, निवेश और सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। वहीं विपक्षी दल बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
असम की राजनीति में इस बार सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए केंद्र से सहयोग की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि इन मुद्दों का इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम चुनाव का असर पूरे उत्तर-पूर्व पर पड़ेगा। यहां बनने वाली सरकार क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच संतुलन तय करेगी। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।
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