17 जनवरी 2026 / वसई-विरार (प्रभाग-27)
डेस्क: नगर निगम चुनाव / मुंबई डेस्क
नोट के दम पर वोट की साजिश?
वसई-विरार महानगरपालिका चुनाव के नतीजे आने के बाद प्रभाग-27 में चुनावी भ्रष्टाचार का एक बड़ा ज्वालामुखी फूट पड़ा है। लक्ष्मी पंकज शुक्ला नामक भाजपा कार्यकर्ता पर मतदाताओं को नकदी बांटने, आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने और प्रचार करने वाली महिलाओं के भुगतान में धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामला क्या है? (Key Highlights)
- ₹1000 का 'कैश' ऑफर: 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला जानकी हाडल ने बहादुरी दिखाते हुए खुलासा किया है कि लक्ष्मी शुक्ला ने उन्हें ₹1000 नकद देने का लालच दिया। विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
- फर्जी शक्ति प्रदर्शन: आरोप है कि एक निजी आवास को 'इलेक्शन वॉर रूम' बनाकर वहां अवैध रूप से भीड़ जुटाई गई और शक्ति प्रदर्शन का ढोंग रचा गया।
नया खुलासा: प्रचार भुगतान को लेकर भारी हंगामा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, चुनाव से करीब तीन दिन पहले लक्ष्मी शुक्ला के निवास स्थान पर कई महिलाओं द्वारा जोर-शोर से हंगामा किया गया।
- धोखाधड़ी का आरोप: प्रदर्शनकारी महिलाओं का दावा था कि उन्हें 6 दिनों तक प्रचार में ले जाया गया, लेकिन तय राशि का भुगतान नहीं किया गया।
- पैसे की हेराफेरी: महिलाओं का आरोप था कि उनसे प्रति महिला ₹1000 देने का वादा किया गया था, लेकिन असल में उन्हें केवल ₹600 ही दिए गए। बाकी 4 दिनों का पैसा डकार लिया गया।
- सड़क पर नोकझोंक: काफी देर तक घर के बाहर हुए इस शोर-शराबे ने यह साबित कर दिया कि प्रचार के लिए पैसे के दम पर भीड़ जुटाई जा रही थी।
पार्टी की हार और छवि को गहरा धक्का
सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रचार के भुगतान को लेकर हुए इस तमाशे ने प्रभाग-27(ए) में भाजपा की साख को भारी नुकसान पहुँचाया। लोगों का मानना है कि लक्ष्मी शुक्ला जैसे कार्यकर्ताओं की इन हरकतों की वजह से ही पार्टी को यहाँ हार का सामना करना पड़ा। मतदाताओं के बीच उपजे अविश्वास और असंतोष ने जीत की संभावनाओं को मिट्टी में मिला दिया।
कानूनी शिकंजा: जेल की हो सकती है तैयारी
यह मामला सीधा-सीधा IPC की धारा 171-B (रिश्वतखोरी) और 171-C (अनुचित प्रभाव) के तहत आता है। यदि चुनाव आयोग और पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करती है, तो इसमें जुर्माना, जेल और भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक तक का प्रावधान है।
जन-आक्रोश: "लक्ष्मी शुक्ला को पार्टी से बाहर करो!"
वसई-विरार की जनता में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है:
क्या BJP ऐसे भ्रष्ट और धोखेबाज कार्यकर्ताओं को शह देगी? नागरिकों की मांग है कि अगर भाजपा खुद को अनुशासित पार्टी कहती है, तो उसे तुरंत लक्ष्मी शुक्ला को पार्टी से दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर करना चाहिए। ऐसे लोग न केवल लोकतंत्र के लिए खतरा हैं, बल्कि अपनी ही पार्टी की लुटिया डुबोने के जिम्मेदार हैं।
हमारी अपील
प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के इस पूरे प्रकरण की जांच करे और तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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