420 और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों के साये में इरशाद खान, और पत्नी चुनावी मैदान में।

 

वसई-विरार।

स्थानीय राजनीति में सक्रिय नेता इरशाद खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। लगातार बदलती राजनीतिक संबद्धताओं और उनके खिलाफ दर्ज गंभीर कानूनी मामलों ने वसई-विरार क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ कर दी है। आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, सभी उनकी राजनीतिक स्थिरता और सार्वजनिक जीवन में विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।

बहु-दलीय राजनीतिक सफ़र, निष्ठा पर सवाल

इरशाद खान का राजनीतिक करियर कई दलों से होकर गुज़रा है, जिसे लेकर उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता पर संदेह जताया जा रहा है।

  • उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस (INC) से की।
  • इसके बाद वे शिवसेना से जुड़े और फिर AIMIM का दामन थामा।
  • मौजूदा समय में चर्चाएं हैं कि आगामी नगरसेवक चुनाव में उनकी पत्नी को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर वसई-विरार प्रभाग 27 से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार दल बदलने की यह प्रवृत्ति मतदाताओं में भ्रम पैदा करती है और किसी भी नेता की विश्वसनीयता को कमजोर करती है।

गंभीर वित्तीय और आपराधिक आरोप

इरशाद खान के खिलाफ स्थानीय नागरिकों द्वारा पहले दर्ज कराई गई शिकायतों में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन शिकायतों में हिंसा, दंगा भड़काने के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं भी शामिल बताई जा रही हैं।

शिकायत पत्रों में उल्लिखित प्रमुख धाराएं इस प्रकार हैं:

  • धारा 420: धोखाधड़ी कर धन प्राप्त करने का आरोप
  • धारा 406: आपराधिक विश्वासघात
  • धारा 506: आपराधिक धमकी
  • धारा 504: जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करने का प्रयास
  • धारा 120B: आपराधिक षड्यंत्र

गंभीर मामलों के बावजूद अब तक अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई है, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

राजनीतिक और जन प्रतिक्रिया

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक पद के उम्मीदवार के लिए बार-बार दल बदलना और साथ ही गंभीर आपराधिक व वित्तीय मामलों का सामना करना, उसकी नैतिक साख को गहरा नुकसान पहुंचाता है।

स्थानीय मतदाता अब चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। लोगों की अपेक्षा है कि उम्मीदवारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति को स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखा जाए, ताकि वे सोच-समझकर एक ईमानदार और विश्वसनीय प्रतिनिधि का चुनाव कर सकें।

Post a Comment

0 Comments