कृषि समाचार डेस्क | पश्चिमी उत्तर प्रदेश | 14 फरवरी 2026
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जिसे राज्य का “गन्ना बेल्ट” भी कहा जाता है, इन दिनों कृषि गतिविधियों के लिहाज़ से काफी सक्रिय बना हुआ है। मेरठ, मुज़फ्फरनगर, बागपत, सहारनपुर, बुलंदशहर और बिजनौर जैसे जिलों में रबी फसल की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। कृषि विभाग के ताज़ा आकलन के अनुसार इस बार गेहूं की बुवाई क्षेत्र में लगभग 3 से 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका कारण समय पर हुई बुवाई और मौसम की अनुकूलता है।
सबसे बड़ी चर्चा गन्ना किसानों को लेकर है। पश्चिमी यूपी देश के कुल गन्ना उत्पादन में बड़ा योगदान देता है। राज्य सरकार ने चालू पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य (SAP) में बढ़ोतरी बनाए रखी है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। गन्ना विभाग के अनुसार चीनी मिलों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कई जिलों में बकाया भुगतान कम हुआ है, हालांकि कुछ मिलों में देरी की शिकायतें अभी भी सामने आ रही हैं। किसान संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि भुगतान 14 दिन की निर्धारित अवधि में पूरा किया जाए।
सिंचाई के मोर्चे पर भी प्रगति दिखाई दे रही है। गंगा और यमुना नहर तंत्र की सफाई और मरम्मत का काम तेज़ी से चल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार भूजल स्तर सामान्य रहने से ट्यूबवेल आधारित सिंचाई में भी आसानी हुई है। साथ ही माइक्रो-इरिगेशन यानी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी योजनाएं सक्रिय हैं। इससे पानी की बचत और उत्पादन दोनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
बागवानी क्षेत्र में भी किसानों की दिलचस्पी बढ़ रही है। सहारनपुर और आसपास के इलाकों में आम और सब्ज़ी उत्पादन को लेकर नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है। पॉलीहाउस खेती और हाई-वैल्यू क्रॉप्स जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर की खेती में वृद्धि देखी गई है। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा किसानों को उन्नत बीज, कीट नियंत्रण और मिट्टी परीक्षण संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
फसल बीमा योजना को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। इस सीजन में बड़ी संख्या में किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण कराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए बीमा सुरक्षा बेहद जरूरी है। हालांकि कुछ किसानों ने दावा निपटान प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है।
बाजार की स्थिति पर नजर डालें तो मंडियों में गेहूं और सरसों की आवक धीरे-धीरे बढ़ रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किसान सतर्क हैं और सरकारी खरीद केंद्रों की तैयारी पर नजर रखे हुए हैं। सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू होगी और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
कुल मिलाकर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र इस समय सकारात्मक रुख में दिखाई दे रहा है। गन्ना मूल्य, सिंचाई व्यवस्था, बागवानी विस्तार और सरकारी योजनाओं के चलते किसानों में उम्मीद का माहौल है। हालांकि समय पर भुगतान और बाजार स्थिरता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। आने वाले महीनों में मौसम और नीति निर्णय यह तय करेंगे कि यह रफ्तार कितनी स्थायी रहती है।
कृषि डेस्क रिपोर्ट | पश्चिमी यूपी
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