अंतरराष्ट्रीय टेक रिपोर्ट
इस्लामाबाद से टेक डेस्क रिपोर्ट। पाकिस्तान की तकनीकी यात्रा कुछ वैसी है जैसे पुरानी बाइक में टर्बो इंजन लगाने की कोशिश — इरादा बड़ा, संसाधन सीमित, और बीच-बीच में धुआँ भी निकलता है।
सबसे पहले आईटी सेक्टर। पाकिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में आईटी एक्सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आईटी निर्यात 2–3 बिलियन डॉलर के आसपास पहुंचा है। फ्रीलांसिंग में पाकिस्तान दुनिया के शीर्ष देशों में गिना जाता है। फाइबर इंटरनेट और स्टार्टअप इकोसिस्टम धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। लेकिन समस्या? राजनीतिक अस्थिरता, इंटरनेट शटडाउन, और नीति में बार-बार बदलाव। टेक सेक्टर को स्थिरता चाहिए, ड्रामा नहीं।
अब रक्षा तकनीक की बात करें। पाकिस्तान ने चीन के सहयोग से JF-17 थंडर जैसे फाइटर जेट विकसित किए हैं। मिसाइल कार्यक्रम भी सक्रिय है। लेकिन अधिकतर हाई-एंड टेक्नोलॉजी में बाहरी सहयोग पर निर्भरता स्पष्ट दिखती है। आत्मनिर्भरता की बातें होती हैं, पर सप्लाई चेन में विदेशी पार्टनर का रोल बड़ा है।
स्पेस सेक्टर में SUPARCO नाम की एजेंसी है, लेकिन उपग्रह लॉन्च के लिए अक्सर चीन की मदद ली जाती है। तुलना अगर भारत के ISRO मॉडल से करें, तो अंतर साफ दिखता है — जहां एक तरफ स्वदेशी लॉन्च व्हीकल और कम लागत मिशन हैं, वहीं दूसरी तरफ साझेदारी-आधारित मॉडल।
डिजिटल गवर्नेंस में भी चुनौतियां हैं। राष्ट्रीय डेटाबेस और पहचान प्रणाली (NADRA) को क्षेत्र में मजबूत माना जाता है, लेकिन साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन कानूनों को लेकर विशेषज्ञों ने कई बार सवाल उठाए हैं।
स्टार्टअप सीन? कराची और लाहौर में कुछ फिनटेक और ई-कॉमर्स स्टार्टअप्स ने निवेश खींचा है। लेकिन विदेशी निवेशकों का भरोसा राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता से प्रभावित होता है। जब मुद्रा संकट और IMF वार्ता सुर्खियों में हों, तो टेक यूनिकॉर्न की कहानी थोड़ी कठिन हो जाती है।
इंटरनेट सेंसरशिप और सोशल मीडिया प्रतिबंध भी टेक इकोसिस्टम के लिए बाधा बनते हैं। बार-बार प्लेटफॉर्म ब्लॉक होना डिजिटल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है। टेक्नोलॉजी नवाचार का आधार खुला संवाद है, और जब नेटवर्क पर ब्रेक लगते हैं, तो स्टार्टअप की रफ्तार भी धीमी हो जाती है।
कुल मिलाकर तस्वीर जटिल है। पाकिस्तान में प्रतिभा की कमी नहीं है। युवा आबादी बड़ी है, फ्रीलांसिंग मजबूत है, और टेक अपनाने की इच्छा भी है। लेकिन संरचनात्मक चुनौतियां — राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक दबाव, और बाहरी निर्भरता — विकास की गति को सीमित करती हैं।
तकनीक केवल लैब में नहीं बनती, वह स्थिर नीति, निवेश और दीर्घकालिक दृष्टि से बनती है।
और टेक की दुनिया में एक नियम साफ है — भावनाओं से नहीं, बैलेंस शीट और बैंडविड्थ से भविष्य बनता है।
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