मेडिकल कॉलेजों का विस्तार, सख्त महामारी नियम और AIIMS की वैश्विक रैंकिंग से हेल्थ सेक्टर में बड़ा बदलाव

 

14 फ़रवरी 2026

आज स्वास्थ्य को लेकर देश और दुनिया दोनों से कई अहम खबरें सामने आई हैं, जो स्वास्थ्य नीति, अस्पताल सुविधाएं, स्थानीय सार्वजनिक स्वास्थ्य नियम और चिकित्सा ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देती हैं। इस रिपोर्ट में हम इन अपडेट्स को विस्तार से समझेंगे।

सबसे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को गति देने के लिए बड़े सुधारों का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया कि राज्य में “वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज” नीति के तहत मेडिकल कॉलेजों की संख्या 36 से बढ़ाकर 81 कर दी गई है, जिसमें 81वां मेडिकल कॉलेज अमेठी में शुरू हुआ है। इन कॉलेजों में सुपर-स्पेशियलिटी सुविधाएं, मुफ्त डायलिसिस, ICU और डिजिटल एक्स-रे जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में 5.46 करोड़ आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे जरूरतमंद मरीजों को इलाज में मदद मिल सके। इसके अलावा स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती में भी 45,978 नई नियुक्तियाँ की गई हैं, जिससे स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इंसेफ्लाइटिस जैसे रोगों पर भी नियंत्रण स्थापित किया गया है और भविष्य में टेलीमेडिसिन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाने की योजना है।

उधर हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संशोधित महामारी रोग नियम (Epidemic Disease Regulations) जारी किए हैं, जो मार्च 31, 2027 तक लागू रहेंगे। इन नए नियमों के तहत डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे वेक्टर-जनित रोगों की पुष्टि रिपोर्टिंग हर सरकारी और निजी स्वास्थ्य सुविधा को 24 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा कुछ प्रमुख डायग्नोस्टिक टेस्टों पर मूल्य सीमा तय की गई है जिससे सर्वसाधारण को अधिक खर्च न करना पड़े। नियमों का उल्लंघन करने पर ₹1,000 से लेकर ₹10,000 तक की सज़ा का प्रावधान है।

हॉस्पिटल स्तर पर भी एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) को 2026 के ग्लोबल टॉप 250 हॉस्पिटल्स की रिपोर्ट में विश्व स्तर पर 6वाँ स्थान मिला है। रिपोर्ट के अनुसार AIIMS की खासियत इसकी उच्च-स्तरीय अनुसंधान क्षमता, क्लिनिकल केयर और मरीजों को सस्ते और सम्मानजनक इलाज प्रदान करने की प्रतिबद्धता है। दुनिया के प्रतिष्ठित अस्पतालों के बीच यह स्थान भारत की स्वास्थ्य सेवा को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाने में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

खैर, सिर्फ़ बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ही नहीं हो रहा है, बल्कि राज्य स्तर पर स्वास्थ्य तकनीक और डिजिटल प्रणालियों का भी इस्तेमाल तेज़ किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में आयोजित “ट्रांसफॉर्मेशन डायलॉग्स” कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अस्पतालों में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और डेटा-आधारित प्रौद्योगिकी के उपयोग से स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार करने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि टेलीमेडिसिन सेवाएँ और मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम (Tele Manas जैसे) को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक के माध्यम से सेवाएँ हर इलाके में फैलाई जा सकती हैं और रोगी अनुभव बेहतर हो सकता है।

अंततः, स्वास्थ्य क्षेत्र में आज यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि भारत सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि हेल्थ सिस्टम की गुणवत्ता, निगरानी, डिजिटाइजेशन और रोग नियंत्रण पर भी ध्यान दे रहा है। अस्पतालों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता, महामारी कानूनों का अद्यतन, और तकनीकी उपयोग को प्राथमिकता देना वास्तव में स्वास्थ्य सेक्टर को भविष्य-तैयार बना रहा है।

कुल मिलाकर:
• मेडिकल कॉलेजों और सुविधाओं का विस्तार
• महामारी रोग नियंत्रण के सख्त नियम
• वैश्विक मान्यता प्राप्त हॉस्पिटल रैंकिंग
• तकनीक के ज़रिये स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण

ये सब संकेत हैं कि स्वास्थ्य सेवा अब सिर्फ अभिगम्य नहीं, बल्कि अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम बनती जा रही है।

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