Jobs और Education सेक्टर में फैला गोरखधंधा: युवाओं के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

 

देश का Jobs और Education सेक्टर युवाओं के भविष्य की नींव माना जाता है। इसी पर राष्ट्र की प्रगति, रोजगार और सामाजिक संतुलन टिका होता है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है कि पिछले कुछ वर्षों में नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में गोरखधंधा, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ा है। फर्जी भर्तियां, नकली डिग्री, परीक्षा घोटाले, कोचिंग माफिया और प्लेसमेंट फ्रॉड जैसे मामलों ने इस सेक्टर की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी नौकरियों का जाल: बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा

Jobs सेक्टर में सबसे बड़ा गोरखधंधा फर्जी नौकरी विज्ञापनों का है। अखबारों, सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर आकर्षक सैलरी, सरकारी नौकरी और विदेश में रोजगार के नाम पर युवाओं को फंसाया जाता है। आवेदन फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और ट्रेनिंग के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। नौकरी मिलने से पहले ही कंपनी गायब हो जाती है। बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा इस जाल में आसानी से फंस जाते हैं।

फर्जी भर्ती एजेंसियां और प्लेसमेंट फ्रॉड

कई तथाकथित भर्ती एजेंसियां खुद को बड़ी कंपनियों का अधिकृत पार्टनर बताकर युवाओं से मोटी रकम वसूलती हैं। इंटरव्यू के नाम पर फर्जी कॉल लेटर, नकली जॉइनिंग लेटर और जाली ऑफर लेटर दिए जाते हैं। कुछ मामलों में युवाओं को ट्रेनिंग के नाम पर महीनों तक रखा जाता है, लेकिन नौकरी कभी नहीं मिलती। यह गोरखधंधा महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक फैल चुका है।

शिक्षा में भ्रष्टाचार: डिग्री खरीदो, नौकरी पाओ

Education सेक्टर में फर्जी कॉलेज और विश्वविद्यालयों का जाल तेजी से फैल रहा है। पैसे देकर डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बेचे जा रहे हैं। कई संस्थान बिना क्लास और परीक्षा के ही मार्कशीट और डिग्री दे देते हैं। इससे केवल मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होता है, बल्कि समाज में अयोग्य लोगों की संख्या भी बढ़ती है।

परीक्षा घोटाले: मेहनत की जगह पैसे की जीत

सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और फर्जी अभ्यर्थियों के मामले लगातार सामने रहे हैं। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो जाना अब आम बात हो गई है। कई बार टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग कर परीक्षा केंद्रों पर नकल कराई जाती है। इससे ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का मनोबल टूटता है।

कोचिंग माफिया: शिक्षा को बना दिया व्यापार

कोचिंग संस्थान अब शिक्षा नहीं, बल्कि मुनाफे का बड़ा उद्योग बन चुके हैं। महंगी फीस, डर का माहौल और फर्जी सफलता के दावे कर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया जाता है। कई कोचिंग सेंटर टॉपर की तस्वीरें दिखाकर अपनी ब्रांडिंग करते हैं, जबकि सच्चाई यह होती है कि उनमें से कई छात्र कभी वहां पढ़े ही नहीं होते। मानसिक दबाव के चलते छात्रों में तनाव और आत्महत्या जैसी घटनाएं भी बढ़ी हैं।

स्किल ट्रेनिंग के नाम पर धोखाधड़ी

सरकार और निजी संस्थाओं द्वारा चलाई जा रही स्किल ट्रेनिंग योजनाओं में भी गोरखधंधा देखने को मिलता है। फर्जी ट्रेनिंग सेंटर सिर्फ कागजों पर कोर्स पूरा दिखाकर सरकारी फंड हड़प लेते हैं। छात्रों को तो सही ट्रेनिंग मिलती है और ही रोजगार। इससे स्किल इंडिया जैसी योजनाओं की छवि को नुकसान पहुंचता है।

डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन एजुकेशन स्कैम

ऑनलाइन एजुकेशन और वर्क-फ्रॉम-होम के बढ़ते चलन के साथ डिजिटल फ्रॉड भी बढ़े हैं। फर्जी ऑनलाइन कोर्स, नकली सर्टिफिकेट और डेटा एंट्री जैसी नौकरियों के नाम पर ठगी की जाती है। कई ऐप और वेबसाइट्स छात्रों और जॉब सीकर्स का निजी डेटा भी बेच देती हैं।

सिस्टम की कमजोरियां: क्यों फल-फूल रहा है गोरखधंधा

Jobs और Education सेक्टर में गोरखधंधे के पीछे कई कारण हैंबेरोजगारी, प्रतियोगिता, कमजोर निगरानी व्यवस्था, भ्रष्टाचार और कानूनी कार्रवाई में देरी। पीड़ित युवा अक्सर बदनामी या समय की बर्बादी के डर से शिकायत नहीं करते, जिससे अपराधियों का हौसला बढ़ता है।

युवाओं और समाज पर असर

इस गोरखधंधे का सबसे बड़ा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी बढ़ती है। योग्य उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं और अयोग्य लोग सिस्टम में घुस जाते हैं, जिससे कार्यक्षमता और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं।

समाधान और सुधार की जरूरत

इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कानून, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा संस्थानों की नियमित जांच जरूरी है। फर्जी विज्ञापनों और एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। छात्रों और युवाओं को भी जागरूक रहना होगा और किसी भी नौकरी या कोर्स से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और शिकायत तंत्र को मजबूत करना समय की मांग है।

निष्कर्ष

Jobs और Education सेक्टर में फैला गोरखधंधा केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि यह देश के भविष्य पर सीधा हमला है। जब तक सरकार, प्रशासन, शैक्षणिक संस्थान और समाज मिलकर इस समस्या के खिलाफ खड़े नहीं होते, तब तक योग्य युवाओं के सपनों को कुचला जाता रहेगा। एक ईमानदार, पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम ही युवाओं को सुरक्षित भविष्य दे सकता है।

 

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