बिज़नेस और एक्सटॉर्शन माफिया के बीच बढ़ती आपराधिक गतिविधियां: अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

 

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका व्यापार और उद्योग होता है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक, सभी देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन जब व्यापार जगत अपराधियों और एक्सटॉर्शन माफिया के निशाने पर जाता है, तो केवल कारोबार प्रभावित होता है, बल्कि कानून-व्यवस्था और निवेश का माहौल भी बिगड़ जाता है। आज भारत के कई हिस्सों में बिज़नेस और रंगदारी मांगने वाले गिरोहों के बीच आपराधिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

क्या है एक्सटॉर्शन और कैसे फैलता है इसका नेटवर्क

एक्सटॉर्शन यानी डर, धमकी या हिंसा के जरिए व्यापारियों से जबरन पैसा वसूलना। यह अपराध अब केवल लोकल गुंडों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठित अपराध का रूप ले चुका है। फोन कॉल, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, ईमेल और यहां तक कि जेल के अंदर से भी व्यापारियों को धमकियां दी जाती हैं। कई मामलों में खुद को किसी बड़े गैंग या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्ति का नाम लेकर डराया जाता है।

छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योग तक निशाने पर

पहले एक्सटॉर्शन का शिकार छोटे दुकानदार और स्थानीय व्यापारी होते थे, लेकिन अब बड़े बिल्डर्स, रियल एस्टेट कारोबारी, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, होटल, मॉल, माइंस और फैक्ट्रियां भी निशाने पर हैं। करोड़ों के टर्नओवर वाले कारोबारियों से मोटी रकम मांगी जाती है। जो पैसा नहीं देता, उसे जान से मारने, परिवार को नुकसान पहुंचाने या बिज़नेस तबाह करने की धमकी दी जाती है।

कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर एक्सटॉर्शन माफिया के लिए सबसे आसान टारगेट माना जाता है। साइट पर काम रोकने, मजदूरों को डराने और मशीनरी जलाने जैसी घटनाएं आम हैं। कई बार स्थानीय अपराधी खुद को यूनियन या सामाजिक संगठन का प्रतिनिधि बताकर रंगदारी वसूलते हैं। बिज़नेस चलाने के लिए मजबूर बिल्डर अक्सर चुपचाप पैसा दे देते हैं।

गैंगवार और आपराधिक हिंसा

जहां बिज़नेस बड़ा होता है, वहां एक्सटॉर्शन गैंगों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी होती है। एक ही कारोबारी से अलग-अलग गिरोह पैसे मांगते हैं। इससे गैंगवार, फायरिंग और हत्या जैसी घटनाएं सामने आती हैं। कई बड़े शहरों में व्यापारियों की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि उन्होंने रंगदारी देने से इनकार कर दिया था।

राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक चुप्पी

एक्सटॉर्शन जैसे अपराध बिना किसी संरक्षण के लंबे समय तक नहीं चल सकते। कई मामलों में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण या स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक ढील मिलती है। कुछ अपराधी चुनावी फंडिंग या प्रभावशाली संपर्कों के कारण खुलेआम धमकी देते हैं। इससे व्यापारियों का पुलिस और सिस्टम से भरोसा उठने लगता है।

डिजिटल एक्सटॉर्शन: नया और खतरनाक रूप

डिजिटल युग में एक्सटॉर्शन ने नया रूप ले लिया है। फर्जी ईमेल, साइबर धमकी, डेटा लीक करने की चेतावनी और सोशल मीडिया पर बदनाम करने का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं। कई बिज़नेस हाउस का डेटा हैक कर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती है। इस तरह की साइबर एक्सटॉर्शन तेजी से बढ़ रही है और इसका पता लगाना भी मुश्किल होता है।

बिज़नेस पर आर्थिक और मानसिक असर

एक्सटॉर्शन का सीधा असर कारोबार की लागत और मुनाफे पर पड़ता है। रंगदारी देना व्यापार के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाता है। कई छोटे व्यापारी कारोबार बंद करने या जगह बदलने को मजबूर हो जाते हैं। इसके साथ ही व्यापारियों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव, डर और असुरक्षा की भावना बढ़ती है। यह माहौल किसी भी स्वस्थ बिज़नेस इकोसिस्टम के लिए घातक है।

निवेश और रोजगार पर असर

जब किसी इलाके में एक्सटॉर्शन और अपराध बढ़ता है, तो वहां निवेशक आने से कतराते हैं। नई फैक्ट्रियां और उद्योग नहीं लगते, जिससे रोजगार के अवसर घटते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था कमजोर होती है और बेरोजगारी बढ़ती है, जो आगे चलकर और अपराध को जन्म देती है।

कानून और एजेंसियों की चुनौती

पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए एक्सटॉर्शन नेटवर्क को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है। कई बार व्यापारी डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं कराते। सबूतों की कमी और गवाहों का डर भी कार्रवाई में बाधा बनता है। हालांकि, हाल के वर्षों में तकनीकी निगरानी, कॉल ट्रैकिंग और गैंगस्टर एक्ट जैसे कानूनों से कुछ हद तक सख्ती बढ़ी है।

समाधान और आगे की राह

बिज़नेस और एक्सटॉर्शन के बीच बढ़ते अपराध को रोकने के लिए बहुस्तरीय रणनीति की जरूरत है। व्यापारियों की सुरक्षा के लिए विशेष सेल, गोपनीय शिकायत तंत्र और त्वरित कार्रवाई जरूरी है। राजनीतिक संरक्षण पर सख्ती, जेल से चल रहे नेटवर्क पर रोक और साइबर एक्सटॉर्शन से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ानी होगी। साथ ही, व्यापार संगठनों को भी एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।

निष्कर्ष

बिज़नेस और एक्सटॉर्शन माफिया के बीच हो रही आपराधिक गतिविधियां केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था और निवेश माहौल पर सीधा हमला हैं। जब तक अपराधियों का डर व्यापारियों के मन से नहीं निकलेगा और सिस्टम पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा नहीं होगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। एक सुरक्षित, निर्भीक और पारदर्शी कारोबारी माहौल ही देश को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है।

 

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