स्पेशल इन्वेस्टिगेशन: क्या ईरान फिर से बनने जा रहा है 'पारसी राष्ट्र'? सोशल मीडिया के दावों का सच

 

तेहरान/नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों से यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक खबर जंगल की आग की तरह फैल रही है कि ईरान में 'इस्लाम खत्म' होने वाला है और वहां प्राचीन 'पारसी धर्म' (Zoroastrianism) की वापसी हो रही है। वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ईरानी जनता अब सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर रही है। लेकिन क्या वाकई 1400 साल बाद ईरान अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है? हमारी पड़ताल में जो सच सामने आया, वह सोशल मीडिया के दावों से काफी अलग है।

1. अफ़वाह की शुरुआत कहाँ से हुई?

ईरान में 2022 में हुए 'हिजाब विरोधी आंदोलन' (Mahsa Amini protests) के बाद से ही जनता में धार्मिक शासन के प्रति गुस्सा बढ़ा है। हालिया आर्थिक तंगी और पाबंदियों के बीच कुछ वीडियो वायरल हुए जिसमें लोग पारसी प्रतीकों (जैसे 'फरावहार') के साथ नज़र आए। इसी को आधार बनाकर कई चैनलों ने दावा कर दिया कि ईरान ने इस्लाम को त्यागने का फैसला कर लिया है।

2. आधिकारिक स्थिति: अफवाह बनाम हकीकत

वर्तमान में ईरान की सत्ता पर 'इस्लामी मौलवियों' (Clerics) का नियंत्रण है।

  1. संविधान: ईरान का संविधान आज भी 'इस्लामी गणतंत्र' (Islamic Republic) के ढांचे पर आधारित है।
  2. सरकारी रुख: ईरान की सरकार ने ऐसी किसी भी योजना का संकेत नहीं दिया है। वहां धर्म परिवर्तन (Apostasy) अभी भी एक गंभीर कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है।
  3. पारसी समुदाय की संख्या: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में पारसियों की संख्या करीब 25,000 है। हालांकि कुछ अनौपचारिक सर्वे बताते हैं कि लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान के तौर पर पारसी धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन यह कोई 'आधिकारिक धर्मांतरण' नहीं है।

3. विशेषज्ञों की राय: धार्मिक नहीं, राजनीतिक है गुस्सा

मध्य पूर्व के मामलों के जानकारों का कहना है कि ईरानी जनता का विरोध 'इस्लाम' के खिलाफ नहीं, बल्कि 'सत्तावादी शासन' (Theocratic Regime) के खिलाफ है।

ईरान की नई पीढ़ी अपनी प्राचीन सभ्यता (Persian Identity) पर गर्व करती है और उसे एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है, ताकि वे मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दे सकें। इसे धर्म परिवर्तन से जोड़ना जल्दबाजी और भ्रामक है।

4. फैक्ट-चेक: वीडियो का सच

सोशल मीडिया पर जिन वीडियो को दिखाकर 'इस्लाम खत्म' होने की बात कही जा रही है, वे दरअसल पुराने विरोध प्रदर्शनों के हैं। उनमें लोग 'आज़ादी' और 'लोकतंत्र' के नारे लगा रहे हैं, न कि किसी विशेष धर्म को राजधर्म बनाने की मांग कर रहे हैं।

निष्कर्ष (The Bottom Line)

ईरान में इस्लाम खत्म होने या पारसी धर्म के राजधर्म बनने की खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। ईरान एक गहरे आंतरिक संकट और वैचारिक संघर्ष से गुजर रहा है, जहाँ लोग 'धर्म' से ज्यादा 'सेक्युलर गवर्नेंस' (धर्मनिरपेक्ष शासन) की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे केवल 'क्लिकबेट' और अधूरी जानकारी का हिस्सा हैं।

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