City News 24 | 05 जनवरी 2026
अहमदाबाद / गुजरात | न्यूज़ डेस्कगुजरात, जो लंबे समय से व्यवसाय और निवेश के लिए भारत के सबसे आकर्षक राज्यों में से एक माना जाता रहा है, इस बार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के आंकड़ों में शीर्ष 5 राज्यों की सूची से बाहर हो गया है। यह स्थिति गुजरात की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक चेतावनी की तरह मानी जा रही है और उसे संभावित निवेशकों के ध्यान की आवश्यकता पर जोर देती है।
हाल के दिन जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 के पहले छह महीनों (अप्रैल से सितंबर 2025) में गुजरात को कुल 2.39 अरब डॉलर का FDI मिला, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में प्राप्त निवेश से करीब 39.5% कम है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्य में निवेश की गति में तेज गिरावट आई है।
क्या कारण है गिरावट के पीछे?
विश्लेषकों के अनुसार, कई कारण हैं जिनसे गुजरात को निवेश के मामले में पिछड़ने का सामना करना पड़ा है:
- प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों में बदलाव: अन्य राज्यों — खासकर हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु — ने निवेश आकर्षित करने के लिए सबसे ज्यादा रियायती पैकेज और आसान नियम पेश किए हैं, जिससे वैश्विक निवेशकों की रुचि वहां अधिक बनी है।
- भौतिक अवसंरचना पर दबाव: जबकि गुजरात की औद्योगिक अवसंरचना देश में सबसे मजबूत मानी जाती है, हाल के समय में कुछ लॉजिस्टिक और कनेक्टिविटी मुद्दों ने निवेशकों को चिंतित किया है।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: विश्व अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका, मुद्रा विनिमय की अस्थिरता और उभरती बाजारों में निवेश की शिफ्टिंग भी FDI प्रवाह को प्रभावित कर रही है।
कौन से राज्य आगे हैं?
उन निवेश आंकड़ों में गुजरात आज शीर्ष 5 में शामिल नहीं है, जिनमें निम्न राज्यों का नाम शामिल है:
- हरियाणा
- दिल्ली
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
इन राज्यों ने बेहतर निवेश नीतियों, आसान उद्योग स्थापना प्रक्रियाओं और निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देकर निवेशकों को आकर्षित किया है।
विश्लेषकों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि गुजरात के लिए यह गिरावट निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया है कि:
- निवेश अनुकूल नीतियों को फिर से पुनः सुधार करना चाहिए।
- विशेष आर्थिक क्षेत्रों और तकनीकी पार्कों को और आकर्षक बनाना चाहिए।
- इनोवेशन और स्टार्टअप सेक्टर को प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि युवा उद्यमियों को निवेश का विकल्प मिले।
सरकार की प्रतिक्रिया
गुजरात सरकार ने इस आंकड़े को संभावित सुधार की दिशा का संकेत बताते हुए कहा है कि वे सकारात्मक कदम उठा रहे हैं, जिसमें उद्योग समन्वय बैठकों, निवेश सम्मेलनों और वैश्विक रोडशो के माध्यम से निवेशकों का ध्यान वापस खींचने की कोशिश शामिल हैं।
क्या यह गिरावट स्थायी होगी?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर गुजरात अपनी नीतियों में तेजी से सुधार करता है, तो वह फिर से शीर्ष निवेशक राज्यों की सूची में वापसी कर सकता है। फिलहाल, यह गिरावट राज्य की नीतिगत चुनौतियों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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