महा-संग्राम 2026: महाराष्ट्र में 'महायुति' का परचम, मुंबई से नागपुर तक बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

 

मुंबई | रविवार, 18 जनवरी 2026

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 'मिनी विधानसभा' कहे जाने वाले इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और महायुति गठबंधन ने विपक्ष का सूपड़ा साफ करते हुए अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। सबसे बड़ा उलटफेर मुंबई (BMC) में देखने को मिला है, जहां तीन दशकों का वर्चस्व खत्म हो गया है।

महानगरों का रिपोर्ट कार्ड: कहां कौन पड़ा भारी?

महानगरपालिकाकुल सीटेंविजेता दलमुख्य आकर्षण
मुंबई (BMC)227बीजेपी-महायुति30 साल बाद ठाकरे परिवार का किला ढहा।
पुणे (PMC)165बीजेपी (119 सीटें)प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता बरकरार।
नागपुर (NMC)156बीजेपीमहिला उम्मीदवारों की रिकॉर्ड जीत।
नवी मुंबई111बीजेपीस्पष्ट बहुमत के साथ दबदबा कायम।

1. मुंबई: बीएमसी में 'कमल' का उदय, ठाकरे युग का अंत

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, BMC में इस बार इतिहास रचा गया है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर शिवसेना (UBT) के दशकों पुराने एकाधिकार को समाप्त कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता ने 'परिवारवाद' को दरकिनार कर विकास और नए चेहरे को तरजीह दी है। कई दिग्गज और पूर्व पार्षदों को इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है।

2. पुणे और नागपुर: गढ़ और मजबूत हुए

  • पुणे: बीजेपी ने 165 में से 119 सीटें जीतकर विपक्ष को मुकाबले से बाहर कर दिया। यह जीत न केवल स्थानीय है बल्कि 2029 के विधानसभा चुनावों के लिए भी एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।
  • नागपुर: संघ के गढ़ में बीजेपी ने अपनी पकड़ और मजबूत की है। यहाँ की खास बात यह रही कि महिला प्रतिनिधियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो भविष्य की राजनीति के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

3. वसई-विरार और नवी मुंबई

नवी मुंबई में भी बीजेपी ने अपनी सत्ता कायम रखी है। वहीं, वसई-विरार में मुकाबला बेहद कड़ा रहा, जहाँ अंतिम दौर की मतगणना तक निर्दलीयों और छोटे दलों ने प्रमुख पार्टियों के पसीने छुड़ा दिए।

विपक्ष में खलबली: हार के बाद मंथन का दौर

महाविकास अघाड़ी (MVA), विशेषकर शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के लिए ये नतीजे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं।

  • शिवसेना (UBT): मुंबई जैसे अपने सबसे मजबूत आधार को खोना पार्टी के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहा है।
  • कांग्रेस: शहरी इलाकों में पार्टी का आधार और खिसकता नजर आ रहा है। विपक्षी नेता अब ईवीएम और रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आंतरिक समीक्षा बैठकें भी शुरू हो गई हैं।

आगे क्या?

इन नतीजों के बाद अब सभी की नजरें नए मेयरों के चयन पर हैं। बीजेपी इस जीत को प्रधानमंत्री मोदी और राज्य नेतृत्व की नीतियों पर जनता की मुहर बता रही है। आने वाले दिनों में इन नगर निगमों के विकास कार्यों में नई तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि केंद्र, राज्य और अब स्थानीय निकाय में एक ही गठबंधन की सत्ता है।

यह केवल चुनाव की जीत नहीं, बल्कि विकास के प्रति जनता के अटूट विश्वास की जीत है। मुंबई ने अब बदलाव को चुन लिया है। — एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का बयान

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