नई दिल्ली | विशेष बुलेटिन | 18 जनवरी 2026
भारत में शिक्षा और रोजगार का परिदृश्य आज एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। जहां एक ओर देश के उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र और राज्य सरकारों ने बड़ी भर्तियों और नीतिगत सुधारों के जरिए युवाओं के लिए नए द्वार खोले हैं।
1. हेडलाइन रिपोर्ट: भारत के 75% डिग्रीधारी युवाओं के पास 'नौकरी' के कौशल नहीं
शिक्षा जगत से आज की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट से आई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 75% उच्च शिक्षा संस्थान (विश्वविद्यालय और कॉलेज) उद्योग की जरूरतों के मुताबिक कौशल प्रदान करने में विफल रहे हैं।
- मुख्य समस्या: छात्र डिग्रियां तो हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनके पास प्रैक्टिकल नॉलेज, क्रिटिकल थिंकिंग और डिजिटल साक्षरता की भारी कमी है।
- प्रभाव: इसके कारण इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और बेसिक साइंस के लाखों स्नातक 'Under-employed' रह जाते हैं या उन्हें अपनी योग्यता से बहुत नीचे की नौकरी करनी पड़ती है।
- समाधान: सरकार अब 'इंडस्ट्री-एकेडेमिया लिंकेज' मॉडल पर जोर दे रही है, जिसमें डिग्री के साथ-साथ अनिवार्य इंटर्नशिप और वोकेशनल ट्रेनिंग को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है।
2. सरकारी नौकरी अपडेट: NABARD, UPPSC और NCERT में बंपर भर्तियां
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए आज का दिन सूचनाओं से भरा रहा। देश की प्रमुख सरकारी संस्थाओं ने विज्ञापन जारी किए हैं:
| संस्था | पद का नाम | कुल पद | अंतिम तिथि |
| NABARD | डेवलपमेंट/हिंदी असिस्टेंट (Group B) | 162 | आवेदन शुरू |
| UPPSC | प्रशासनिक पद (Group A & B) | 2150+ | जल्द जारी |
| NCERT | नॉन-एकेडमिक (Group A, B, C) | 173 | 30 जनवरी (विस्तारित) |
3. REET मेन्स 2026: कठिन पेपर और मौसम ने बढ़ाई परीक्षार्थियों की चुनौती
राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) मेन्स के दूसरे दिन आज लाखों अभ्यर्थी शामिल हुए।
- फीडबैक: लेवल-2 (विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान) के अभ्यर्थियों के अनुसार, इस बार प्रश्नों का स्तर उम्मीद से कहीं अधिक कठिन था। विशेषकर 'एनालिटिकल' प्रश्नों ने छात्रों को उलझाया।
- चुनौती: उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद केंद्रों पर भारी भीड़ देखी गई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार कट-ऑफ में गिरावट आ सकती है।
4. UGC के क्रांतिकारी बदलाव: असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नियमों में लचीलापन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए पात्रता मानदंडों में बड़े सुधार का ड्राफ्ट पेश किया है:
- NET की अनिवार्यता में छूट: अब M.Tech या M.E. डिग्री धारकों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर बनने हेतु NET परीक्षा अनिवार्य नहीं रहेगी। इसका उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञों को सीधे शिक्षण क्षेत्र से जोड़ना है।
- प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस: कॉलेजों में अब उन अनुभवी पेशेवरों को भी वरीयता दी जाएगी जिनके पास लंबा कार्य अनुभव है, भले ही उनके पास पारंपरिक पीएचडी डिग्री न हो।
5. स्कूल शिक्षा सुधार: हरियाणा में प्रवेश के लिए '6 साल' का सख्त नियम
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को सख्ती से लागू करते हुए घोषणा की है कि सत्र 2026-27 से कक्षा-1 में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष होनी अनिवार्य है।
- उद्देश्य: बच्चों पर कम उम्र में पढ़ाई का बोझ कम करना और उनके मानसिक विकास के अनुरूप सीखने की प्रक्रिया को मानकीकृत करना।
6. ग्रामीण भारत को 'रोजगार गारंटी' का नया सुरक्षा कवच: G-RAM G ऐक्ट 2025
सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान देने के लिए Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (G-RAM G) Act के तहत रोजगार के दिनों को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है।
- यह कानून ग्रामीण युवाओं को न केवल मजदूरी बल्कि 'स्किल-आधारित' आजीविका की भी गारंटी देता है, जिससे शहरों की ओर पलायन कम होने की संभावना है।
विश्लेषण: 2026 में युवाओं के लिए क्या बदल रहा है?
आज की खबरों का विश्लेषण करें तो स्पष्ट है कि भारत की शिक्षा प्रणाली अब 'डिग्री-केंद्रित' होने के बजाय 'आउटपुट-केंद्रित' हो रही है। जहां एक ओर कॉलेजों की विफलता एक चुनौती है, वहीं सरकारी भर्तियों में तेजी और पात्रता नियमों में बदलाव एक सकारात्मक संकेत हैं।
विशेषज्ञ की राय: 2026 वह साल है जहां सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए शिक्षा की गुणवत्ता पर सबसे अधिक निवेश किया जा रहा है।
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