NEWSDESK | NATIONAL POLITICS
देश की राष्ट्रीय राजनीति इस समय तेज़ हलचल और तीखे सियासी टकराव के दौर से गुजर रही है। केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच संसद से सड़क तक संघर्ष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार एक ओर विकास, स्थिरता और वैश्विक भूमिका को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष सरकार पर लोकतंत्र, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगा रहा है।
हालिया संसद सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में आर्थिक असमानता बढ़ रही है और युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने संसद में महंगाई और बेरोज़गारी पर विस्तृत चर्चा की मांग की, लेकिन कई बार हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही।
संसद में सरकार बनाम विपक्ष
संसद के भीतर विपक्षी गठबंधन ने केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बना रही है और विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है। इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।
गठबंधन राजनीति की नई तस्वीर
राष्ट्रीय राजनीति में गठबंधन की भूमिका एक बार फिर निर्णायक बनती जा रही है। सत्तारूढ़ एनडीए को मज़बूत बनाए रखने के लिए भाजपा लगातार सहयोगी दलों से संवाद बढ़ा रही है। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन में शामिल दल साझा मंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन जैसे नेता विपक्षी एकजुटता के पक्ष में बयान दे रहे हैं, हालांकि नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
चुनावी राज्यों पर सियासी नज़र
आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में रणनीति तेज़ हो गई है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार राज्यों का दौरा कर पार्टी संगठन को मज़बूत करने में जुटे हैं। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी चुनावी राज्यों में सक्रियता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे आने वाले लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को अपने राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रख रहे हैं। हालिया जनसभाओं में उन्होंने बुनियादी ढांचे, डिजिटल इंडिया और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का ज़िक्र किया। सरकार का दावा है कि भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री के समर्थकों का कहना है कि उनके नेतृत्व में देश ने स्थिरता और निर्णायक शासन देखा है।
विपक्ष का हमला और जवाबी राजनीति
वहीं विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाता रहा है। राहुल गांधी ने हाल ही में कहा कि देश में विचारधारा की लड़ाई चल रही है और यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
संघीय ढांचे पर बहस
केंद्र और राज्यों के बीच टकराव भी राष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बन गया है। कई गैर-भाजपा शासित राज्यों ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। इस पर सरकार का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा।
जनता और बदलती राजनीति
राजनीतिक माहौल में जनता की भूमिका भी बदलती दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए राजनीतिक मुद्दे तेज़ी से लोगों तक पहुंच रहे हैं। राजनीतिक दल अब केवल रैलियों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन माध्यमों से भी मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। जनता अब नेताओं से सिर्फ़ वादे नहीं, बल्कि ज़मीनी काम का हिसाब मांग रही है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर देश की राष्ट्रीय राजनीति इस समय निर्णायक दौर में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और राहुल गांधी के नेतृत्व में मुखर होता विपक्ष, दोनों ही आने वाले समय को बेहद अहम मान रहे हैं। संसद की राजनीति, राज्यों के चुनाव और गठबंधन की दिशा यह तय करेगी कि भारत की सियासत आगे किस मोड़ पर जाएगी। फिलहाल इतना साफ़ है कि राष्ट्रीय राजनीति में टकराव, रणनीति और संभावनाओं का दौर जारी है।
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