भारत में 2026 के आम बजट से पहले राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। केंद्र सरकार फरवरी के पहले सप्ताह में बजट पेश करने की तैयारी में जुटी है और उससे पहले देशभर में अलग-अलग वर्गों की अपेक्षाएँ खुलकर सामने आ रही हैं। आम जनता से लेकर उद्योग जगत, किसान संगठनों, मध्यम वर्ग और युवाओं तक, सभी की निगाहें आने वाले बजट पर टिकी हुई हैं।
भारत सरकार के सामने इस बार की सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रण में रखना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और टैक्स सिस्टम में राहत देना है। बीते एक साल में खाद्य पदार्थों, ईंधन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर गहरा असर डाला है। ऐसे में बजट को लेकर उम्मीद की जा रही है कि सरकार राहत भरे कदम उठा सकती है।
महंगाई बनी सबसे बड़ा मुद्दा
देश में खुदरा महंगाई दर हाल के महीनों में लगातार चर्चा में रही है। खासतौर पर दाल, सब्ज़ी, दूध और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। ग्रामीण इलाकों में हालात और भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, जहां आय सीमित है लेकिन खर्च बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस बजट में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण और कृषि निवेश पर विशेष ध्यान देना होगा।
रोजगार और युवाओं की चिंता
भारत में हर साल करोड़ों युवा नौकरी की तलाश में बाज़ार में उतरते हैं। ऐसे में रोजगार सृजन सरकार के सामने एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। निजी क्षेत्र में भर्ती की रफ्तार धीमी रही है, जबकि सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया लंबी होने के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है। युवा संगठनों और छात्र समूहों ने मांग की है कि बजट में स्टार्टअप्स, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट के लिए बड़े प्रावधान किए जाएं।
मध्यम वर्ग को टैक्स राहत की उम्मीद
मध्यम वर्ग लंबे समय से आयकर स्लैब में बदलाव और टैक्स छूट की मांग करता रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतनभोगी वर्ग पर टैक्स का बोझ भारी महसूस हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार इनकम टैक्स स्लैब में राहत देती है तो इससे खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। बजट से पहले सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर टैक्स राहत सबसे ज़्यादा चर्चा में है।
किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा और सिंचाई परियोजनाएँ हमेशा से बजट का अहम हिस्सा रही हैं। हाल के वर्षों में मौसम की मार और लागत बढ़ने से किसानों की परेशानियाँ बढ़ी हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार से उम्मीद की जा रही है कि कृषि निवेश, ग्रामीण सड़कों, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ाया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आय दोनों में सुधार हो सकता है।
बुनियादी ढांचा और विकास योजनाएँ
सरकार का फोकस बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर बना हुआ है। रेलवे, सड़क, बंदरगाह और डिजिटल कनेक्टिविटी को देश की आर्थिक रीढ़ माना जा रहा है। बजट से पहले संकेत मिल रहे हैं कि इन क्षेत्रों में पूंजीगत खर्च बढ़ाया जा सकता है। इससे निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
राजनीतिक दृष्टिकोण से अहम बजट
यह बजट राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद कई राज्यों में चुनाव होने हैं। विपक्षी दल सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि आम आदमी की समस्याओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि सरकार संतुलित और विकासोन्मुखी बजट पेश करेगी। संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई है।
उद्योग जगत और निवेशकों की अपेक्षाएँ
उद्योग जगत टैक्स सरलीकरण, नीति स्थिरता और निवेश अनुकूल माहौल की मांग कर रहा है। विदेशी निवेशकों की भी नजर बजट पर है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि भारत वैश्विक निवेश के लिए कितना आकर्षक बना रहेगा। सरकार की कोशिश है कि बजट के जरिए ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को और मज़बूती दी जाए।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 2026 का आम बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। महंगाई, रोजगार, टैक्स राहत, किसान कल्याण और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे इस बजट की कसौटी होंगे। अब देखना यह होगा कि सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को किस दिशा में ले जाती है।
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