नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
भारत में रोज़गार और शिक्षा हमेशा से राजनीति, नीति और समाज के केंद्र में रहे हैं। देश की युवा आबादी, तेज़ी से बदलती तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केंद्र सरकार की Jobs & Education Policies केवल सामाजिक योजनाएँ नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की आधारशिला मानी जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में शिक्षा और रोज़गार को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कई बड़े नीतिगत फैसले लिए हैं, जिनका असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है।
शिक्षा से रोज़गार तक: नीति में बड़ा बदलाव
पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था पर यह आरोप लगता रहा कि डिग्री तो मिलती है, लेकिन नौकरी नहीं। इसी सोच को बदलने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू की। इस नीति का लक्ष्य केवल पाठ्यक्रम बदलना नहीं, बल्कि शिक्षा को रोज़गारोन्मुख बनाना है।
NEP 2020 के तहत:
- स्कूली शिक्षा में स्किल-बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा
- कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education)
- मल्टीपल एंट्री–एग्ज़िट सिस्टम
- उच्च शिक्षा में रिसर्च और इंडस्ट्री कनेक्शन
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार,
भारत को डिग्री होल्डर नहीं, स्किल होल्डर चाहिए।
स्किल इंडिया मिशन: पढ़ाई के साथ हुनर
केंद्र सरकार की Skill India Mission और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) शिक्षा और रोज़गार के बीच सेतु का काम कर रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को ऐसे कौशल देना है जो सीधे नौकरी या स्वरोज़गार से जुड़े हों।
अब तक:
- लाखों युवाओं को शॉर्ट-टर्म स्किल ट्रेनिंग
- IT, हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर पर फोकस
- इंडस्ट्री के साथ मिलकर सर्टिफिकेशन
सरकार का मानना है कि हर युवा को पारंपरिक कॉलेज डिग्री की ज़रूरत नहीं, बल्कि मार्केट–रेडी स्किल्स ज़्यादा ज़रूरी हैं।
नई शिक्षा, नई नौकरियाँ
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने शिक्षा और रोज़गार की परिभाषा बदल दी है। आज:
- कोडिंग
- डेटा एनालिटिक्स
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- डिजिटल मार्केटिंग
जैसे क्षेत्र नई नौकरियों का केंद्र बन रहे हैं। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑनलाइन और हाइब्रिड एजुकेशन को वैध और प्रोत्साहित किया है।
UGC और AICTE को निर्देश दिए गए हैं कि वे:
- इंडस्ट्री–ओरिएंटेड कोर्सेज़ को मंज़ूरी दें
- विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी को आसान बनाएं
रोज़गार नीति: सरकार बनाम आलोचक
केंद्र सरकार का दावा है कि:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
- मेक इन इंडिया
- PLI (Production Linked Incentive) स्कीम
के ज़रिए लाखों रोज़गार पैदा हुए हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार,
रोज़गार केवल सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र और स्वरोज़गार में भी है।
हालाँकि विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, यह आरोप लगाते हैं कि:
- बेरोज़गारी दर चिंता का विषय बनी हुई है
- शिक्षित युवाओं को स्थायी नौकरियाँ नहीं मिल रहीं
यह बहस लगातार जारी है कि सरकारी नीतियाँ ज़मीनी स्तर पर कितनी सफल हैं।
सरकारी नौकरियाँ और परीक्षा सुधार
सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं में बढ़ती नाराज़गी को देखते हुए केंद्र सरकार ने:
- भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
- परीक्षा कैलेंडर
- डिजिटल एप्लिकेशन सिस्टम
जैसे सुधार लागू किए हैं।
साथ ही अग्निपथ योजना को एक नए रोज़गार मॉडल के रूप में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को अल्पकालिक सैन्य अनुभव और बाद में नागरिक जीवन में अवसर देना है।
शिक्षा में समानता और पहुँच
Jobs & Education नीति का एक अहम पहलू है—समान अवसर।
इसके लिए केंद्र सरकार ने:
- छात्रवृत्ति योजनाएँ
- SC/ST/OBC और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम
- डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म (DIKSHA, SWAYAM)
शुरू किए हैं, ताकि ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की खाई कम हो।
भविष्य की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती होगी:
- शिक्षा की गुणवत्ता
- स्किल और इंडस्ट्री के बीच तालमेल
- तेज़ी से बदलती तकनीक के साथ पाठ्यक्रम का अद्यतन
यदि शिक्षा और रोज़गार नीति में निरंतर सुधार नहीं हुआ, तो डेमोग्राफिक डिविडेंड बोझ में बदल सकता है।
निष्कर्ष: नीति सही दिशा में, अमल अहम
केंद्र सरकार की Jobs & Education से जुड़ी नीतियाँ यह संकेत देती हैं कि भारत अब केवल डिग्री आधारित सिस्टम से आगे बढ़कर स्किल, इनोवेशन और एम्प्लॉयबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।
हालाँकि, इन नीतियों की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती हैं।
भारत का युवा वर्ग अब सवाल पूछ रहा है—
“पढ़ाई के बाद नौकरी कहाँ है?”
और यही सवाल आने वाले वर्षों में केंद्र सरकार की हर नीति की कसौटी बनेगा।
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