Report :
एंटरटेनमेंट की
दुनिया
बाहर
से
जितनी
चमकदार
और
आकर्षक
दिखाई
देती
है,
अंदर
से
उतनी
ही
जटिल
और
कई
बार
डरावनी
भी
होती
है।
फिल्म,
टीवी,
वेब
सीरीज़,
म्यूज़िक इंडस्ट्री और
मॉडलिंग जैसे
क्षेत्रों में
नाम,
शोहरत
और
पैसे
की
चकाचौंध के
पीछे
अपराध, शोषण और मानसिक उत्पीड़न की
कई
कहानियाँ छिपी
रहती
हैं।
बीते
कुछ
वर्षों
में
सामने
आए
मामलों
ने
यह
साबित
किया
है
कि
यह
इंडस्ट्री केवल
ग्लैमर
तक
सीमित
नहीं
है,
बल्कि
इसके
भीतर
कई
गंभीर
सामाजिक समस्याएँ भी
मौजूद
हैं।
शोषण का स्वरूप
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में
शोषण
कई
रूपों
में
देखने
को
मिलता
है।
इसमें
यौन शोषण, मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक धोखाधड़ी और करियर को लेकर ब्लैकमेलिंग प्रमुख
हैं।
खासकर
नए
कलाकार,
मॉडल
और
छोटे
कलाकार
इस
शोषण
के
सबसे
बड़े
शिकार
बनते
हैं।
काम
दिलाने
के
नाम
पर
गलत
मांगें
रखना,
रोल
के
बदले
समझौते
का
दबाव
बनाना
और
काम
न
मिलने
की
धमकी
देना,
यह
सब
लंबे
समय
से
इंडस्ट्री का
काला
सच
रहा
है।
यौन शोषण और ‘कास्टिंग काउच’
एंटरटेनमेंट की
दुनिया
में
सबसे
ज्यादा
चर्चा
कास्टिंग काउच को
लेकर
होती
रही
है।
कई
अभिनेत्रियों, मॉडल्स
और
कलाकारों ने
खुलकर
स्वीकार किया
है
कि
उन्हें
काम
के
बदले
गलत
समझौतों का
सामना
करना
पड़ा।
यह
शोषण
केवल
महिलाओं तक
सीमित
नहीं
है;
कई
पुरुष
कलाकार
भी
इस
तरह
के
अनुभवों की
बात
कर
चुके
हैं,
लेकिन
सामाजिक दबाव
के
कारण
वे
खुलकर
सामने
नहीं
आ
पाते।
अपराध और नशे की संस्कृति
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में
नशे से जुड़े अपराध भी
एक
बड़ी
समस्या
हैं।
ड्रग्स
का
इस्तेमाल, अवैध
पार्टियाँ और
नशीले
पदार्थों की
सप्लाई
से
जुड़े
मामलों
में
कई
बार
बड़े
नाम
भी
सामने
आ
चुके
हैं।
यह
नशा
न
केवल
कलाकारों के
स्वास्थ्य को
नुकसान
पहुँचाता है,
बल्कि
उन्हें
अपराध
की
दुनिया
में
भी
धकेल
देता
है।
कई
युवा
कलाकार
मानसिक
तनाव
और
प्रतिस्पर्धा के
दबाव
में
नशे
की
गिरफ्त
में
आ
जाते
हैं।
मानसिक शोषण और दबाव
चमक-दमक के पीछे
कलाकारों पर
मानसिक दबाव भी
बहुत
अधिक
होता
है।
लगातार
बेहतर
दिखने
का
दबाव,
सोशल
मीडिया
ट्रोलिंग, असफलता
का
डर
और
निजी
जीवन
पर
सार्वजनिक टिप्पणी कलाकारों को
मानसिक
रूप
से
तोड़
देती
है।
कई
मामलों
में
यह
अवसाद
(डिप्रेशन) और
आत्महत्या जैसे
गंभीर
कदमों
तक
पहुँच
जाता
है।
यह
भी
एक
तरह
का
शोषण
है,
जिसे
अक्सर
नजरअंदाज कर
दिया
जाता
है।
आर्थिक धोखाधड़ी और कॉन्ट्रैक्ट फ्रॉड
एंटरटेनमेंट की
दुनिया
में
आर्थिक
अपराध
भी
आम
हैं।
नए
कलाकारों से
मोटी
रकम
लेकर
फर्जी
फिल्म
या
एल्बम
का
सपना
दिखाना,
कॉन्ट्रैक्ट में
धोखाधड़ी करना
और
मेहनताना न
देना
जैसे
मामले
सामने
आते
रहते
हैं।
कई
बार
छोटे
कलाकार
कानूनी
जानकारी की
कमी
के
कारण
इन
जालों
में
फँस
जाते
हैं।
महिलाओं और बच्चों का शोषण
महिलाओं के
साथ-साथ बाल कलाकारों का शोषण भी
एक
गंभीर
मुद्दा
है।
कम
उम्र
में
काम
शुरू
करने
वाले
बच्चों
पर
पढ़ाई,
मानसिक
विकास
और
निजी
जीवन
का
असर
पड़ता
है।
कई
बार
अभिभावकों और
मैनेजमेंट की
लालच
बच्चों
के
भविष्य
को
खतरे
में
डाल
देती
है।
सोशल मीडिया और नई चुनौतियाँ
डिजिटल
दौर
में
सोशल
मीडिया
ने
कलाकारों को
नई
पहचान
दी
है,
लेकिन
इसके
साथ
नए
अपराध
भी
जुड़े
हैं।
ऑनलाइन ट्रोलिंग, साइबर बुलिंग, मॉर्फ्ड तस्वीरें और ब्लैकमेलिंग अब
आम
हो
गई
हैं।
खासकर
महिला
कलाकार
और
कंटेंट
क्रिएटर इस
तरह
के
अपराधों का
ज्यादा
शिकार
बनते
हैं।
कानून और जागरूकता
बीते
वर्षों
में
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में
अपराध
और
शोषण
के
खिलाफ
आवाज़
उठी
है।
कई
कलाकार
खुलकर
सामने
आए
हैं,
जिससे
जागरूकता बढ़ी
है।
कानूनन
शिकायत
दर्ज
कराने,
आंतरिक
शिकायत
समितियाँ बनाने
और
वर्कप्लेस पर
सुरक्षा को
लेकर
कुछ
कदम
जरूर
उठाए
गए
हैं,
लेकिन
ज़मीनी
स्तर
पर
अभी
बहुत
कुछ
किया
जाना
बाकी
है।
इंडस्ट्री की जिम्मेदारी
प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, प्रोडक्शन हाउस
और
मैनेजमेंट की
जिम्मेदारी बनती
है
कि
वे
एक
सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण तैयार
करें।
साथ
ही,
कलाकारों को
भी
अपने
अधिकारों के
प्रति
जागरूक
होना
होगा
और
किसी
भी
तरह
के
शोषण
के
खिलाफ
आवाज़
उठानी
होगी।
निष्कर्ष
एंटरटेनमेंट की
दुनिया
का
ग्लैमर
जितना
आकर्षक
है,
उसका
अंधेरा
पक्ष
उतना
ही
गंभीर
और
चिंताजनक है।
अपराध
और
शोषण
केवल
कुछ
लोगों
की
समस्या
नहीं,
बल्कि
पूरे
सिस्टम
की
कमजोरी
को
दर्शाते हैं।
जब
तक
कानून,
इंडस्ट्री और
समाज
मिलकर
ईमानदार प्रयास
नहीं
करेंगे,
तब
तक
इस
चमक
के
पीछे
छिपी
सच्चाई
को
बदला
नहीं
जा
सकता।
एक
सुरक्षित, पारदर्शी और
जिम्मेदार एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ही
कलाकारों और
समाज—दोनों के भविष्य
को
बेहतर
बना
सकती
है।
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