मुंबई | 3 मार्च 2026
मुंबई के कई इलाकों में हाल के दिनों में सार्वजनिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान तेज़ आवाज़ में बजाए जा रहे कुछ भोजपुरी गानों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ कार्यक्रमों में ऐसे गीत बजाए जा रहे हैं जिनके बोल आपत्तिजनक और अश्लील हैं, जिससे पारिवारिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
यह मुद्दा खासतौर पर उन इलाकों में सामने आया है जहां उत्तर प्रदेश और बिहार से आए प्रवासी बड़ी संख्या में रहते हैं। हालांकि समुदाय के कई जिम्मेदार सदस्यों ने स्पष्ट कहा है कि अश्लीलता को किसी एक क्षेत्र या समुदाय से जोड़ना गलत है। उनका कहना है कि “हर समाज में अच्छे और बुरे कंटेंट दोनों होते हैं, इसे पूरी संस्कृति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।”
सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ी शिकायतें
मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों जैसे मीरा रोड, भायंदर, नालासोपारा और भिवंडी के कुछ हिस्सों से शिकायतें मिली हैं कि होली और अन्य आयोजनों के दौरान खुले ट्रकों और स्टेज कार्यक्रमों में ऊंची आवाज़ में बज रहे कुछ गानों के बोल महिलाओं और बच्चों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी संघों ने पुलिस से ध्वनि प्रदूषण और आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि त्योहार का उत्साह अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक मर्यादा और कानून का पालन भी जरूरी है।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि किसी कार्यक्रम में आपत्तिजनक गीत बजाए जाते हैं या ध्वनि सीमा से अधिक शोर किया जाता है तो संबंधित आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने कहा, “धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन सभी को करने का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर। अश्लील या भड़काऊ सामग्री की शिकायत मिलने पर पुलिस जांच करती है और आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।”
सामाजिक संगठनों की अपील
कुछ सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भोजपुरी संगीत की समृद्ध परंपरा है जिसमें लोकगीत, भक्ति गीत और पारंपरिक धुनें शामिल हैं। कुछ निर्माताओं द्वारा व्यावसायिक लाभ के लिए बनाए गए भड़काऊ गानों से पूरी भाषा और संस्कृति की छवि प्रभावित होती है।
सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सकारात्मक और पारिवारिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कई जगहों पर समुदाय के लोगों ने स्वयं पहल कर “फैमिली फ्रेंडली प्लेलिस्ट” तैयार की है ताकि त्योहारों में स्वस्थ मनोरंजन हो सके।
व्यापक संदर्भ
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में क्षेत्रीय संगीत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लेकिन व्यूज़ और लोकप्रियता की दौड़ में कई बार अश्लीलता को बढ़ावा मिलता है। यह केवल भोजपुरी संगीत तक सीमित नहीं है; अन्य भाषाओं में भी इसी तरह की प्रवृत्तियां देखी गई हैं।
मुंबई जैसे बहुसांस्कृतिक शहर में जहां अलग-अलग राज्यों के लोग साथ रहते हैं, वहां सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सार्वजनिक मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निष्कर्ष
त्योहारों और आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक एकता और आनंद है। यदि किसी प्रकार की सामग्री से समाज का एक वर्ग असहज महसूस करता है, तो संवाद और जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं।
मुंबई में उठी यह बहस केवल संगीत तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक आचरण, सांस्कृतिक जिम्मेदारी और कानून के पालन से भी जुड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और समुदाय मिलकर इस मुद्दे का समाधान किस प्रकार निकालते हैं।
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