महाराष्ट्र – राज्य में लंबे समय से लंबित महानगरपालिका और नगर निकाय चुनावों की तैयारियाँ अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुकी हैं। 15 जनवरी 2026 को 29 नगर निगमों में मतदान होना है और मतगणना 16 जनवरी को होगी, जिसमें मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC), पुणे, नागपुर तथा अन्य प्रमुख महानगर शामिल हैं।
राज्य
चुनाव
आयोग
ने
चुनाव
कार्यक्रम जारी
कर
आचार
संहिता
लागू
कर
दी
है,
और
निर्वाचन प्रक्रिया तेज़ी
से
आगे
बढ़
रही
है।
कुल
2,869 सीटों
के
लिए
33,606 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं, जिसमें
औसत
लगभग
11 उम्मीदवार प्रति सीट देखे
जा
रहे
हैं,
जो
एक
तीव्र
प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति का
संकेत
है।
निर्विरोध जीत पर सियासी विवाद
चुनावों से
पहले
ही
महायुति (BJP-Shiv Sena-NCP)
गठबंधन
के
कई
उम्मीदवारों ने
निवृह्चित या निर्विरोध जीत दर्ज
की
है।
खास
तौर
पर
कई
महानगरों में
विपक्षी उम्मीदवारों के
नामांकन या
वापस
लेने
की
प्रक्रिया के
चलते
महायुति के
कई पार्षद निर्विरोध विजयी घोषित
किए
जा
चुके
हैं,
जिनमें
सबसे
ज़्यादा संख्या
बीएमसी और ठाणे-कालन-डोंबिवली जैसे
महानगर
निकायों से
है।
लेकिन
इस
पर
विपक्ष और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने
राज्य
चुनाव
आयोग
से
“NOTA” विकल्प
की
मांग
की
है
ताकि
निर्विरोध विजयों
के
खिलाफ
मतदाता
विकल्प
दे
सकें
और
लोकतांत्रिक प्रक्रिया को
मजबूत
किया
जा
सके।
विपक्ष
के
नेताओं
का
आरोप
है
कि
सत्ता
पक्ष
“धनबल,
दबाव
और
प्रशासनिक दिक़्क़तों” का
उपयोग
कर
चुनावी
मैदान
को
अपने
पक्ष
में
प्रभावित कर
रहा
है।
ठाणे में छिड़ा नया विवाद
ठाणे
महानगर
पालिका
क्षेत्र में
चुनावी
प्रक्रिया को
लेकर
एक
नया
विवाद
सामने
आया
है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) नेताओं ने
आरोप
लगाया
है
कि
कुछ
returning officers ने
विपक्षी उम्मीदवारों के
नामांकन में
गड़बड़ी कर
महायुति के
उम्मीदवारों को
निर्विरोध विजय
दिलाई।
इन
नेताओं
ने
संबंधित अधिकारियों के
खिलाफ
जांच
और
स्थानांतरण की
मांग
की
है,
साथ
ही
24 घंटे के भीतर कार्रवाई न होने पर धरना प्रदर्शन की
चेतावनी भी
दी
है।
मतदान केंद्रों पर त्रुटियाँ और स्थानीय समस्याएँ
चुनावों के
दौरान
प्रशासनिक चुनौतियाँ भी
देखने
को
मिल
रही
हैं।
उदाहरण
के
तौर
पर
ठाणे के एक मतदान केंद्र पर स्कूल के एथलेटिक्स ट्रैक पर तंबू लगने से खेल गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिससे
स्थानीय युवाओं
और
खेलप्रेमियों ने
रोष
व्यक्त
किया
है
और
प्रशासन से
हस्तक्षेप की
मांग
की
है।
बड़ी सियासी लड़ाई और विपक्ष की रणनीतियाँ
बीएमसी
समेत
अन्य
महानगरपालिकाओं की
यह
लड़ाई
केवल
स्थानीय निकाय
स्तर
तक
सीमित
नहीं
है,
बल्कि
महाराष्ट्र की
राजनीतिक दिशा
को
भी
प्रभावित करेगी।
विपक्षी महा
विकास
अघाड़ी
(MVA) और
अन्य
पार्टियाँ महायुति की
बढ़त
को
रोकने
की
रणनीतियाँ बना
रही
हैं
और
गठबंधन
विकल्पों पर
भी
विचार
हो
रहा
है।
कुल मिलाकर
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