ICAR का ऐतिहासिक कदम: 25 फसलों की 184 नई किस्में लॉन्च, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

 

नई दिल्ली:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भारतीय कृषि को एक नई दिशा देने और किसानों की आय में क्रांतिकारी वृद्धि लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। ICAR ने अनुसंधान और विकास के वर्षों के अथक प्रयासों के बाद, 25 प्रमुख फसलों की कुल 184 नई किस्में जारी करने का निर्णय लिया है। इस पहल को कृषि उत्पादकता को मजबूत बनाने और भारत को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ 'आत्मनिर्भर कृषि देश' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

उत्पादन, पोषण और प्रतिरोध का त्रिवेणी संगम

ये 184 नई फसल किस्में केवल अधिक उपज देने वाली नहीं हैं, बल्कि ये आधुनिक कृषि की तीन सबसे बड़ी चुनौतियोंउत्पादन, पोषण मूल्य (Nutritional Value) और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease Resistance)—को एक साथ संबोधित करती हैं।

ICAR के महानिदेशक (DG) ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, "हमारा लक्ष्य केवल किसानों की पैदावार बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी फसलें देना है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर सकें और उपभोक्ताओं को बेहतर पोषण प्रदान कर सकें।"

·         बेहतर उत्पादन: इन नई किस्मों को विशेष रूप से ऐसे आनुवंशिक गुणों (Genetic Traits) के साथ विकसित किया गया है जो प्रति हेक्टेयर भूमि पर अधिकतम उपज सुनिश्चित करते हैं। इससे केवल किसानों का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि देश की बढ़ती खाद्य मांग को भी पूरा करने में मदद मिलेगी।

·         रोग-प्रतिरोधक क्षमता: यह इन किस्मों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। धान, गेहूँ और दालों की नई किस्में अब सामान्य कीटों और फफूंद जनित रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी होंगी। इससे किसानों को कीटनाशकों और फंगीसाइड्स पर कम खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत कम होगी।

·         पोषक तत्वों से भरपूर: कई नई किस्में बायोफोर्टिफाइड (Biofortified) हैं, यानी उनमें आवश्यक विटामिन और खनिजों की मात्रा को वैज्ञानिक रूप से बढ़ाया गया है। उदाहरण के लिए, लौह-तत्व और जिंक से भरपूर बाजरे और विटामिन- से भरपूर मक्के की किस्में कुपोषण से लड़ने में सहायक होंगी।

किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति

ICAR का स्पष्ट मानना है कि प्रौद्योगिकी और बेहतर बीज ही किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने की कुंजी हैं। नई किस्मों के इस्तेमाल से केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली उपज के लिए उन्हें बाज़ार में बेहतर मूल्य भी मिल सकेगा।

यह पहल प्रधानमंत्री की किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति के साथ पूरी तरह से मेल खाती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसान प्रति हेक्टेयर अधिक और स्वस्थ फसल उगाएगा, तो उसकी शुद्ध आय में स्वतः ही वृद्धि होगी। इसके अलावा, रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण फसल के नुकसान (Crop Loss) का जोखिम भी काफी कम हो जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की नींव

इन नई किस्मों का विकास स्थानीय जलवायु परिस्थितियों और विभिन्न कृषि-पारिस्थितिक क्षेत्रों (Agro-Ecological Zones) की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि ये बीज देश के हर कोने में सफलतापूर्वक उपयोग किए जा सकें।

ICAR की इस पहल को 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन के तहत कृषि उत्पादकता को वैश्विक स्तर तक ले जाने का एक मजबूत प्रयास माना जा रहा है। ये किस्में भारत को केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने, बल्कि वैश्विक बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बनने में भी सक्षम बनाएंगी।

ICAR अब राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से इन बीजों को किसानों तक पहुँचाने के लिए एक विस्तृत वितरण नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि जल्द से जल्द किसान इस नई तकनीक का लाभ उठा सकें।

 


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