ओडिशा में नाबालिग बच्ची के साथ बर्बर अपराध, बारगढ़ कोर्ट ने दोषी को सुनाई मृत्युदंड की सजा

 

बारगढ़ (ओडिशा)।
ओडिशा से मानवता को झकझोर देने वाला एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के दोषी को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। बारगढ़ की जिला अदालत ने छह साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में आरोपी प्रशांत बाग (21) को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” यानी दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना है।

अदालत के अनुसार, आरोपी ने बच्ची को मछली पकड़ने का झांसा देकर अपने साथ ले गया और उसके साथ अमानवीय कृत्य करने के बाद निर्मम हत्या कर दी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पूरे राज्य में भारी आक्रोश देखने को मिला था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले की फास्ट ट्रैक सुनवाई कराई गई।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के कृत्य ने न केवल एक मासूम की जान ली, बल्कि समाज की अंतरात्मा को भी झकझोर कर रख दिया है। ऐसे अपराधों में नरमी दिखाना समाज के लिए घातक होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कठोर सजा देना समय की जरूरत है, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे।

मृत्युदंड के साथ-साथ अदालत ने पीड़िता के परिवार को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि यह मुआवजा परिवार के दर्द की भरपाई तो नहीं कर सकता, लेकिन उनके भविष्य को संभालने में कुछ हद तक मददगार हो सकता है।

सरकारी वकील ने अदालत में मजबूत सबूत और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत किया। बचाव पक्ष की दलीलों को अदालत ने खारिज कर दिया।

इस फैसले के बाद राज्यभर में न्यायपालिका की सराहना हो रही है। सामाजिक संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है। उनका मानना है कि ऐसे फैसले अपराधों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

वहीं, इस घटना ने एक बार फिर देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सजा ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सतर्कता और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

कुल मिलाकर, बारगढ़ कोर्ट का यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों पर तेज़ न्याय और सख़्त कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जो न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत करता है।

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