बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने पिछले एक दशक में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी प्रगति की है। टी20 और वनडे फॉर्मेट में बांग्लादेश के खिलाड़ी कई बार बड़ी टीमों को हराकर अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद आईपीएल जैसी प्रतिष्ठित लीग में उन्हें मौका न मिलना कई सवाल खड़े करता है। क्रिकेट प्रेमियों का कहना है कि यह केवल प्रदर्शन का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक, व्यावसायिक और राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं।
जानकारों के अनुसार, आईपीएल फ्रेंचाइज़ियां खिलाड़ियों का चयन केवल खेल कौशल के आधार पर नहीं करतीं, बल्कि मार्केट वैल्यू, उपलब्धता और व्यावसायिक फायदे को भी ध्यान में रखती हैं। बांग्लादेशी खिलाड़ियों के मामले में अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि उन्हें राष्ट्रीय टीम से आसानी से रिलीज़ नहीं मिलती, खासकर द्विपक्षीय सीरीज़ के दौरान। इससे फ्रेंचाइज़ियां उन्हें चुनने से कतराती हैं।
वहीं, कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों की टी20 लीग अनुभव की कमी भी एक वजह हो सकती है। हालांकि, इस तर्क को पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई बांग्लादेशी खिलाड़ी दुनिया की अन्य टी20 लीगों में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके बावजूद आईपीएल में उनकी गैरमौजूदगी लगातार सवालों के घेरे में है।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई फैंस इसे बांग्लादेश क्रिकेट के साथ अन्याय बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे आईपीएल का “अनौपचारिक ट्रेंड” कह रहे हैं, जहां कुछ देशों के खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है। क्रिकेट विश्लेषकों का कहना है कि यदि आईपीएल वास्तव में वैश्विक लीग है, तो उसे हर क्रिकेटिंग देश की प्रतिभा को बराबर का मौका देना चाहिए।
आईपीएल प्रबंधन और बीसीसीआई की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, खिलाड़ियों का चयन पूरी तरह फ्रेंचाइज़ियों का अधिकार होता है और लीग इसमें हस्तक्षेप नहीं करती। बावजूद इसके, बार-बार बांग्लादेशी खिलाड़ियों की अनदेखी से आईपीएल की चयन नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
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