आंध्र प्रदेश में 'स्मार्ट माइक्रो-सिंचाई प्रोजेक्ट' लॉन्च: जल संरक्षण और किसान समृद्धि की ओर नया कदम

अमरावती, आंध्र प्रदेश।

आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए एक नए युग की शुरुआत करते हुए, राज्य के कृषि मंत्री ने आज एक महत्वाकांक्षी 'स्मार्ट माइक्रो-सिंचाई प्रोजेक्ट' का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में कृषि पद्धतियों को आधुनिक बनाना, पानी की बर्बादी को रोकना और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। यह प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक को खेत तक पहुँचाकर कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जल संरक्षण और उत्पादकता में वृद्धि

यह स्मार्ट सिंचाई मिशन विशेष रूप से पानी की बचत पर केंद्रित है। आंध्र प्रदेश, जहाँ कई क्षेत्र मौसमी जल संकट का सामना करते हैं, वहाँ यह प्रोजेक्ट जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता को पूरा करता है।

कृषि मंत्री ने लॉन्च के दौरान बताया, "यह केवल सिंचाई का एक तरीका नहीं है; यह हमारे पानी को बचाने का एक संकल्प है। ऑटोमेशन और अत्याधुनिक स्मार्ट सेंसर के उपयोग से, किसान अब यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि उनके खेत को केवल उतना ही पानी और उर्वरक मिले जितनी वास्तव में आवश्यकता है—न कम, न ज़्यादा।"

पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों में पानी की भारी बर्बादी होती है, लेकिन यह स्मार्ट तकनीक पाइप के माध्यम से सीधे फसल की जड़ों तक पानी पहुँचाकर इस बर्बादी को लगभग खत्म कर देती है। सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान और पोषक तत्वों के स्तर जैसे महत्वपूर्ण डेटा को वास्तविक समय (Real-Time) में मॉनिटर करेंगे और आवश्यकतानुसार पानी के प्रवाह को स्वचालित रूप से नियंत्रित करेंगे।

🌱 20-30% उत्पादन बढ़ने की उम्मीद

कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पानी और उर्वरक के इस सटीक और कुशल उपयोग से फसल उत्पादन में 20% से 30% तक की वृद्धि हो सकती है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़े हुए उत्पादन का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, "बेहतर फसलें, कम लागत और उच्चतम गुणवत्ता—ये तीनों मिलकर हमारे किसानों की आमदनी में भारी वृद्धि करेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे।"

इस तकनीक के कारण उर्वरकों का भी उचित उपयोग होगा, जिससे न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि पर्यावरण पर रासायनिक कचरे का नकारात्मक प्रभाव भी कम होगा। यह प्रोजेक्ट टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) के सिद्धांतों के अनुरूप है।

सब्सिडी का सहारा: हर किसान तक पहुँचेगी तकनीक

इस अत्याधुनिक तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य सरकार ने एक आकर्षक सब्सिडी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, छोटे और सीमांत किसानों को प्रोजेक्ट की कुल लागत पर 55% की भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। वहीं, अन्य श्रेणी के किसानों के लिए भी 45% तक की सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है।

कृषि मंत्री ने कहा, "सब्सिडी का यह मॉडल इसलिए बनाया गया है ताकि तकनीक किसी भी किसान की पहुँच से बाहर न रहे, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। हम चाहते हैं कि हर खेत में स्मार्ट तकनीक का इस्तेमाल हो और हमारा राज्य कृषि उत्पादन में देश का नेतृत्व करे।"

प्रोजेक्ट के पहले चरण में, राज्य के सबसे अधिक जल-तनाव वाले जिलों के 50,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले वर्षों में, इस मिशन को चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश को स्मार्ट और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक मॉडल राज्य बनाने की ओर अग्रसर करेगा।

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