अमेरिका और वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई: वैश्विक राजनीति में भूचाल
वाशिंगटन/दुनिया:
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और वहाँ के नेता निकोलेस मादुरो की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तूफ़ान पैदा कर दिया है, जिसमें बड़े-बड़े देशों और गठबंधनों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
अमेरिका की कार्रवाई और मादुरो का वाटिकर आरोप
अमेरिकी सेना की Delta Force ने ऑपरेशन “एब्सोल्यूट रिजॉल्व” नामक एक बड़े ऑपरेशन के तहत वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को काराकस से पकड़ लिया और उन्हें न्यूयॉर्क के संघीय न्यायालय के सामने पेश किया जाएगा।
मादुरो पर आरोप है कि उसने ड्रग तस्करी नेटवर्क और अवैध समझौतों के ज़रिए संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी मात्रा में कोकेन की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त किया था। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई “न्याय की विजय” है और वे वेनेज़ुएला को अस्थायी रूप से चलाने का दावा कर रहे हैं, ताकि “देश को सुरक्षित संक्रमण” में रखा जा सके।
वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
इस कार्रवाई ने दुनिया को दो धड़ों में बाँट दिया है:
- यूरोपीय संघ और कई पश्चिमी देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका की कार्रवाई के पक्ष में वैचारिक समर्थन दिया है और इसे “मानवाधिकार और शासन के सिद्धांतों की रक्षा” के रूप में देखा है।
- वहीं रूस, चीन, ईरान जैसे देशों ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद” और “अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन” बताया है, और अमेरिका पर दोषारोपण किया है कि वह एक स्वतंत्र देश की संप्रभुता को चोट पहुँचा रहा है।
क्यूबा ने यह भी दावा किया है कि अमेरिका की हमले में उनके लगभग 32 नागरिकों की मौत हुई है, जिससे दूसरी तरफ़ से प्रतिक्रिया और भी तेज हुई है।
🇺🇸 अमेरिका का लक्ष्य
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि वेनेज़ुएला से तेल संसाधनों को “फ्लो करना” और आतंकवाद-नियंत्रण के लिए अमेरिकी प्रभाव को बढ़ाना प्राथमिकता है। इसके लिए वे वेनेज़ुएला के तेल भंडारों का इस्तेमाल करने की भी बात कर रहे हैं।
क्या आगे क्या होगा?
विश्लेषकों के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिका की रणनीति को दर्शाती है, जिसमें वे विशाल प्राकृतिक संसाधनों वाले देशों पर अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इस कदम ने वैश्विक तनाव और शक्ति संतुलन को और विकृत कर दिया है।
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