राजस्थान: गिरता भू-जल स्तर और बढ़ती तपिश; जल संकट से निपटने के लिए सरकार ने तैयार किया 'इमरजेंसी रिस्पांस प्लान'

 

जयपुर | विशेष संवाददाता | 27 जनवरी 2026

राजस्थान, जहाँ का बड़ा हिस्सा थार रेगिस्तान की रेतीली धरा और अरावली की पहाड़ियों से घिरा है, वहां जनवरी के अंत में ही गर्मियों की पदचाप सुनाई देने लगी है। राज्य में गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए भजनलाल सरकार ने आज 'हाई-अलर्ट' जारी किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में हुई एक विशेष बैठक में जलदाय विभाग और आपदा प्रबंधन के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश के किसी भी जिले, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में पानी की किल्लत होने पाए।

1. गिरता भू-जल स्तर: 70% ब्लॉक 'डेंजर ज़ोन' में

हाल ही में जारी केंद्रीय भू-जल बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट और राज्य की ताजा समीक्षा के अनुसार, राजस्थान के अधिकांश जिलों में भू-जल स्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है।

  • डार्क ज़ोन की चुनौती: राज्य के लगभग 249 ब्लॉक्स में से 190 से अधिक अब 'अति-दोहन' (Over-exploited) की श्रेणी में गए हैं।
  • पश्चिमी राजस्थान की स्थिति: बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे सीमावर्ती जिलों में पारंपरिक जल स्रोत सूख रहे हैं, जिससे मवेशियों और इंसानों दोनों के लिए संकट पैदा हो रहा है।

2. 'जल जीवन मिशन' और टैंकरों की तैनाती

सरकार ने "हर घर जल" के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है।

  • टैंकर व्यवस्था: जिन इलाकों में पाइपलाइन का काम अधूरा है या जहाँ जल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं, वहां 1 फरवरी 2026 से सरकारी खर्चे पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू करने का आदेश दिया गया है।
  • अवैध कनेक्शन पर सख्ती: जल चोरी और पेयजल लाइनों से सिंचाई करने वालों के खिलाफ कड़े जुर्माने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

3. किसानों की चिंता: रबी की फसल और सिंचाई का संकट

राजस्थान की अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी है, और पानी की कमी सीधे तौर पर किसानों की कमर तोड़ रही है।

  • फसल सुरक्षा: किसानों ने रबी की फसल (खासकर सरसों और गेहूं) की अंतिम सिंचाई के लिए नहरों में अतिरिक्त पानी छोड़ने की मांग की है।
  • इंदिरा गांधी नहर (IGNP): नहर बंदी की अफवाहों के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेयजल आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन सिंचाई के लिए रोटेशन प्रणाली (Bandi Schedule) को कड़ाई से लागू किया जाएगा ताकि अंतिम छोर (Tail) तक पानी पहुँच सके।

4. सरकार का 'एक्शन प्लान' और जल संरक्षण अभियान

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान पानी की एक-एक बूंद को बचाने का आह्वान किया।

  • मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0: सरकार इस योजना के तहत पुराने टांकों, बावड़ियों और कुओं के पुनरुद्धार (Restoration) के लिए विशेष फंड जारी कर रही है।
  • वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): शहरी इलाकों में नए भवनों के लिए 'रेन वॉटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है और पुराने सरकारी भवनों में इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं।

5. विशेषज्ञों की राय: तकनीक और परंपरा का संगम जरूरी

भू-जल विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान केवल टैंकरों के भरोसे नहीं रह सकता।

  • ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि किसानों को फव्वारा और ड्रिप सिंचाई पर 90% तक सब्सिडी दी जानी चाहिए ताकि कम पानी में अधिक पैदावार हो सके।
  • राष्ट्रीय जल नीति: राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए राज्य को केंद्र से 'विशेष जल सहायता' की आवश्यकता है।

राजस्थान जल प्रोफाइल 2026: एक नज़र में

चुनौती

प्रभावित क्षेत्र

सरकारी समाधान

पीने के पानी की कमी

जोधपुर, नागौर, पाली

टैंकर सप्लाई और नई पाइपलाइन।

सिंचाई संकट

श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़

नहर रोटेशन और सब्सिडी।

खारा पानी (Fluoride)

चुरू, झुंझुनू

आरओ (RO) प्लांट्स की स्थापना।

भू-जल गिरावट

जयपुर शहर, अलवर

वाटर रिसाइकिलिंग और हार्वेस्टिंग।

6. निष्कर्ष: एक सामूहिक जिम्मेदारी

राजस्थान के लिए पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि 'जीवन' है। सरकार के प्रयासों के साथ-साथ आम जनता की जागरूकता ही इस संकट का स्थायी समाधान है। मुख्यमंत्री ने संदेश दिया है कि, "यदि आज हमने पानी नहीं बचाया, तो भविष्य की पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।"

ब्रेकिंग अपडेट: राजस्थान सरकार जल्द ही इस सत्र में 'राज्य जल सुरक्षा अधिनियम' लाने की तैयारी कर रही है, जिसमें पानी के दुरुपयोग को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा। 

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