बिहार: शिक्षा और रोजगार की तपिश से गरमाई सियासत; पटना की सड़कों पर छात्रों का हुंकार और 'भर्ती' पर आर-पार

 

पटना | राज्य ब्यूरो | 27 जनवरी 2026

बिहार की राजनीति एक बार फिर अपने सबसे संवेदनशील मुद्देशिक्षा और रोजगारके इर्द-गिर्द सिमट गई है। आज राजधानी पटना की सड़कों पर हजारों की संख्या में प्रतियोगी छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रिया में कथित देरी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ था। विधानसभा के सत्र के बीच हुए इस आंदोलन ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।

1. पटना की सड़कों पर संग्राम: छात्र बनाम प्रशासन

आज सुबह से ही डाक बंगला चौराहा और गांधी मैदान के आसपास छात्र संगठनों (AISA, छात्र राजद और अन्य स्वतंत्र समूह) ने डेरा डाल दिया था।

  • प्रमुख मांगें: छात्रों की मुख्य मांगें बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी करने और नई रिक्तियों का कैलेंडर घोषित करने की हैं।
  • पुलिसिया कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों ने जब प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस को उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारों (Water Cannons) का इस्तेमाल करना पड़ा। हल्की झड़प में कुछ छात्रों और पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आने की खबरें हैं।

2. सरकार का पक्ष: "नियुक्ति पत्र बांटने का रिकॉर्ड बनाएंगे"

सदन के भीतर मुख्यमंत्री ने युवाओं के आक्रोश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार 'मिशन मोड' में काम कर रही है।

  • नई नियुक्तियों का वादा: शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीनों में शिक्षक भर्ती (TRE 4.0 & 5.0) के तहत 1.5 लाख से अधिक पदों पर बहाली की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
  • पारदर्शिता का दावा: सरकार का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक को रोकने के लिए नया 'एंटी-लीक कानून' कड़ाई से लागू किया गया है, जिसके कारण परीक्षाओं के आयोजन में थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन चयन पूरी तरह से मेधा (Merit) के आधार पर होगा।

3. विपक्ष के तीखे बाण: "रोजगार नहीं, केवल आश्वासन"

विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष ने बयान जारी कर कहा कि बिहार का युवा अब 'जुमलों' से थक चुका है।

  • पलायन का मुद्दा: विपक्ष का आरोप है कि राज्य में उद्योगों की कमी के कारण डिग्री धारी युवा आज भी दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
  • पेपर लीक का इतिहास: पिछले वर्षों में हुए पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए विपक्ष ने मांग की है कि परीक्षाओं का संचालन किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराया जाए।

4. सांख्यिकीय नजरिया: बिहार में बेरोजगारी की चुनौती

तथ्यों के आधार पर देखें तो बिहार के लिए रोजगार का मुद्दा कितना गंभीर है:

  • युवा आबादी: बिहार भारत के सबसे युवा राज्यों में से एक है, जहाँ की लगभग 58% आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है।
  • सरकारी नौकरियों पर निर्भरता: राज्य में निजी क्षेत्र और भारी उद्योगों की कमी के कारण 90% से अधिक युवा सरकारी क्षेत्र (शिक्षण, पुलिस, रेलवे) पर निर्भर हैं।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव: हर साल बिहार से लगभग 15-20 लाख छात्र विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं।

5. आगामी चुनावों पर प्रभाव और निष्कर्ष

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में अब जातिगत समीकरणों के ऊपर 'रोजगार' एक स्वतंत्र वोट बैंक के रूप में उभर रहा है।

  • साइलेंट वोटर: महिला मतदाताओं के बाद अब 'बेरोजगार युवा' बिहार का वह साइलेंट वोटर है जो किसी भी सरकार की हार या जीत तय कर सकता है।
  • रणनीतिक बदलाव: आगामी स्थानीय और विधानसभा चुनावों को देखते हुए, नीतीश सरकार अपनी छवि एक 'नियोक्ता सरकार' (Employer Government) के रूप में पेश करने की हरसंभव कोशिश कर रही है।

बिहार भर्ती अपडेट 2026: एक नज़र में

विभाग

रिक्तियां (संभावित)

स्थिति

शिक्षा (शिक्षक)

1,50,000+

प्रक्रियाधीन

गृह विभाग (पुलिस)

25,000

विज्ञापन जल्द

स्वास्थ्य विभाग

12,000

काउंसलिंग जारी

राजस्व एवं भूमि सुधार

8,000

वेरिफिकेशन चरण

निष्कर्ष:

बिहार की धरती पर शिक्षा और रोजगार केवल आर्थिक मुद्दे नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक प्रतिष्ठा और अस्तित्व की लड़ाई बन चुके हैं। सरकार के लिए चुनौती केवल पद भरने की नहीं है, बल्कि उन पदों को विवादों और कोर्ट-कचहरी से बचाकर युवाओं तक पहुँचाने की है। यदि समय रहते नियुक्तियां पूरी नहीं हुईं, तो छात्रों का यह आक्रोश सत्ता के समीकरणों को बदल सकता है। 

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