स्कूल में ‘फ्री एडमिशन’ का दावा या सिर्फ मार्केटिंग ट्रिक? पोस्टर कुछ और, असली फीस कुछ और

 

नई दिल्ली, 16 मार्च 2026:

देश के कई हिस्सों में स्कूलों के एडमिशन सीजन के दौरान “फ्री एडमिशन” और “डोनेशन फ्री” जैसे दावों वाले पोस्टर और पम्पलेट बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हैं। इन विज्ञापनों में अक्सर अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए यह संदेश दिया जाता है कि स्कूल में एडमिशन बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या डोनेशन के किया जाएगा। लेकिन कई अभिभावकों का कहना है कि जब वे ऐसे स्कूलों में जाकर पूरी जानकारी लेते हैं, तो वास्तविक स्थिति विज्ञापन से काफी अलग नजर आती है।

कई माता-पिता के अनुसार, शुरुआत में “फ्री एडमिशन” का दावा किया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें अलग-अलग प्रकार की फीस के बारे में बताया जाता है। इनमें ट्यूशन फीस, डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी फीस, किताबों का खर्च, यूनिफॉर्म, ट्रांसपोर्ट और अन्य कई चार्ज शामिल होते हैं। इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद कुल राशि काफी अधिक हो जाती है, जिससे “फ्री” शब्द का वास्तविक अर्थ समझना मुश्किल हो जाता है।

अभिभावकों का कहना है कि पोस्टर देखकर ऐसा लगता है कि एडमिशन की प्रक्रिया बहुत कम खर्च में पूरी हो जाएगी, लेकिन स्कूल में जाकर जब पूरी फीस स्ट्रक्चर सामने आती है तो कई परिवारों को आर्थिक दबाव महसूस होता है। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि एडमिशन के समय अलग-अलग मदों में शुल्क लिया जाता है, जिसकी जानकारी पोस्टर या पम्पलेट में स्पष्ट रूप से नहीं दी जाती।

दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि जिन स्कूलों ने अपने प्रचार में “फ्री एडमिशन” या “डोनेशन फ्री” जैसे बड़े दावे नहीं किए, उनकी फीस कई बार इन स्कूलों से कम निकलती है। ऐसे स्कूल आमतौर पर अपनी फीस संरचना पहले से स्पष्ट रखते हैं और अभिभावकों को पूरी जानकारी पहले ही दे देते हैं। इससे माता-पिता के लिए निर्णय लेना आसान हो जाता है और बाद में किसी तरह की गलतफहमी की संभावना कम रहती है।

शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिशन के समय अभिभावकों को केवल विज्ञापन या पोस्टर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। स्कूल चुनते समय फीस संरचना, पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों का अनुभव, सुविधाएँ और स्कूल का वातावरण जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होता है। केवल “फ्री” जैसे शब्दों के आधार पर निर्णय लेना कई बार सही नहीं होता।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि माता-पिता एडमिशन से पहले स्कूल प्रशासन से पूरी फीस स्ट्रक्चर लिखित रूप में मांगें और यह समझें कि पूरे साल में कुल कितना खर्च आने वाला है। इसके अलावा किताबें, यूनिफॉर्म, एक्टिविटी और अन्य अतिरिक्त खर्चों की जानकारी भी पहले से लेना जरूरी है। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी या भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

कुल मिलाकर, एडमिशन के इस समय में अभिभावकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। “फ्री एडमिशन” जैसे दावे कई बार केवल प्रचार का हिस्सा भी हो सकते हैं। इसलिए सही जानकारी जुटाकर, सभी शर्तों को समझकर और अलग-अलग स्कूलों की तुलना करके ही एडमिशन का फैसला लेना समझदारी माना जाता है। इससे अभिभावक अपने बच्चों के लिए बेहतर और सही विकल्प चुन सकते हैं।

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