15 मार्च 2026 को शारिफ भाई रुस्तम अंसारी ने रोज़ा अफ्तारी के अवसर पर एक भव्य और दिल से किया गया आयोजन रखा। यह अफ्तारी दावत उनके परिसर रुस्तम कम्पाउंड, लोहार पाडा, चिंचोटी, कामन, नायगांव ईस्ट, वसई, पालघर (महाराष्ट्र – 401208) में आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और अनुमानतः 500 से भी अधिक रोज़ेदारों और मेहमानों ने मिलकर अफ्तार किया। पूरे आयोजन में भाईचारे, मोहब्बत और अपनापन साफ दिखाई दे रहा था।
दावत की व्यवस्था बहुत ही व्यवस्थित और सम्मानजनक ढंग से की गई थी। महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी ताकि वे आराम से अफ्तारी कर सकें, वहीं बच्चों के लिए भी अलग से बैठने और खाने की व्यवस्था रखी गई थी। शरीफ भाई ने अपने कम्पाउंड में स्थित मस्जिद में भी बड़ी मात्रा में अफ्तारी का खाना भिजवाया, ताकि वहां नमाज़ पढ़ने आने वाले रोज़ेदार भी आसानी से रोज़ा खोल सकें।
शारिफ भाई अंसारी इलाके में एक सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें समाज सेवा की प्रेरणा अपने मरहूम पिता रुस्तम अंसारी से मिली, जो अपने समय के बेहद नेकदिल और लोगों की मदद करने वाले इंसान थे। इलाके के लोग आज भी उन्हें बड़े सम्मान और प्यार से याद करते हैं। कोरोना महामारी के कठिन समय में उनके पिता का इंतकाल हो गया, जो परिवार और पूरे इलाके के लिए एक बड़ा दुखद क्षण था।
उस मुश्किल घड़ी के बाद शारिफ भाई और उनके भाई आरिफ अंसारी ने न सिर्फ अपने पिता का कारोबार संभाला, बल्कि उनकी समाज सेवा की परंपरा को भी पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ आगे बढ़ाया। उनकी माता जी इस्मततारा अंसारी भी एक सम्मानित और स्नेही व्यक्तित्व हैं, जिनका आशीर्वाद और संस्कार पूरे परिवार को सेवा और इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आज इलाके के लोग शारिफ भाई, आरिफ अंसारी और उनके पूरे परिवार को बहुत प्यार और सम्मान देते हैं, क्योंकि यह परिवार हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहता है। यह अफ्तारी दावत सिर्फ एक आयोजन नहीं थी, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत और समाज सेवा की खूबसूरत मिसाल बनकर सबके दिलों में बस गई।
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