हेल्थ बुलेटिन: देश में नई हेल्थ पॉलिसी और 'स्मार्ट मेडिकल' युग की शुरुआत

 

नई दिल्ली | 4 जनवरी, 2026 भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जहाँ एक तरफ दवाओं की गुणवत्ता के लिए नए मानक तय किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल हेल्थ और एआई के जरिए इलाज को आसान बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में इंडियन फार्माकोपिया (IP 2026) का 10वां संस्करण जारी किया है। इस नई नियमावली में 121 नए मोनोग्राफ जोड़े गए हैं, जिनमें कैंसर, डायबिटीज और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं के लिए बेहद सख्त क्वालिटी मानक तय किए गए हैं। पहली बार इसमें रक्त घटकों यानी ब्लड कॉम्पोनेंट्स के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं, जिससे ब्लड बैंक और ट्रांसफ्यूजन के दौरान मरीजों की सुरक्षा और बढ़ जाएगी।

न्यूट्रिशन और लाइफस्टाइल की बात करें तो साल की शुरुआत के साथ ही लोग हेल्थ रिजॉल्यूशन ले रहे हैं, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स ने सोशल मीडिया पर चल रहे हेल्थ मिथकों से बचने की कड़ी सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गलत खान-पान और शक्कर के अत्यधिक सेवन से फैटी लिवर की समस्या देश में तेजी से बढ़ रही है। डाइटिशियंस ने सर्दियों के इस मौसम में अदरक और विशिष्ट प्राकृतिक बीजों के सेवन को डाइजेशन और इम्युनिटी के लिए रामबाण बताया है। साल 2026 में फिटनेस वर्ल्ड में 'शॉर्टकट डाइट' के बजाय 'सस्टेनेबल लाइफस्टाइल' और पर्याप्त नींद को वजन घटाने का सबसे बड़ा मंत्र माना जा रहा है।

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी स्वास्थ्य सेवाएं काफी एडवांस हो चुकी हैं। अब बड़े अस्पतालों में एआई एजेंट्स मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट का सटीक विश्लेषण करने और शुरुआती अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं। वियरेबल टेक जैसे स्मार्टवॉच और रिंग्स अब सिर्फ आपके कदम नहीं गिनतीं, बल्कि आपके स्ट्रेस मार्कर्स और रेस्पिरेटरी सिग्नल्स को ट्रैक कर किसी भी गंभीर बीमारी का पहले ही अलर्ट दे देती हैं। इसके साथ ही सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जिसका मुख्य फोकस ग्रामीण इलाकों में बेहतर इलाज पहुँचाना और टीबी को जड़ से खत्म करना है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए अब गांवों में भी कैंसर और डायबिटीज की स्क्रीनिंग पूरी तरह मुफ्त की जा रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स का सेवन शरीर में ड्रग रेजिस्टेंस पैदा कर रहा है, जो आने वाले समय के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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