नई दिल्ली/बेंगलुरु | 4 जनवरी, 2026 साल 2026 भारतीय युवाओं के लिए अवसरों का एक नया द्वार लेकर आया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय कंपनियां इस साल करीब 10 से 12 मिलियन (1-1.2 करोड़) नई नौकरियां पैदा करने की तैयारी में हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 20% अधिक है। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ता निवेश है।
जॉब मार्केट: AI और ग्रीन एनर्जी का बोलबाला
आईटी और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में पारंपरिक कोडिंग के बजाय अब Generative AI और Prompt Engineering की मांग सबसे ज्यादा है। टाटा मोटर्स और रिलायंस जैसे बड़े समूह अब बैटरी टेक्नोलॉजी, हाइड्रोजन फ्यूल और सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट्स की तलाश कर रहे हैं। बैंकिंग और फाइनेंस (BFSI) सेक्टर में भी डिजिटल पेमेंट और डेटा सिक्योरिटी के चलते हायरिंग में भारी उछाल देखा जा रहा है। 2026 की एक विशेष बात यह है कि अब कंपनियां 'डिग्री' से ज्यादा 'स्किल' (हुनर) को तवज्जो दे रही हैं। यदि आपके पास डेटा साइंस या क्लाउड कंप्यूटिंग की व्यावहारिक जानकारी है, तो आपकी सैलरी में 20-30% तक के इजाफे की संभावना है।
शिक्षा में बदलाव: NEP 2020 का छठा साल और 'स्मार्ट लर्निंग'
भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) अब अपने छठे साल में प्रवेश कर चुकी है, जिससे स्कूलों और कॉलेजों में बड़े जमीनी बदलाव दिख रहे हैं। अब शिक्षा का माध्यम केवल किताबों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि Experiential Learning (अनुभवात्मक शिक्षा) पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में वोकेशनल कोर्सेज यानी व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है ताकि छात्र स्कूल खत्म करते ही रोजगार के काबिल बन सकें। उच्च शिक्षा में Academic Bank of Credits (ABC) सिस्टम अब पूरी तरह सक्रिय है, जिससे छात्र एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज में अपनी पढ़ाई के क्रेडिट्स को आसानी से ट्रांसफर कर पा रहे हैं।
उभरते हुए 'जॉब हॉटस्पॉट्स' और टियर-2 शहरों की ग्रोथ
2026 में पुणे, इंदौर, विशाखापत्तनम और जयपुर जैसे शहर नए 'जॉब हब' बनकर उभरे हैं। बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के बजाय इन छोटे शहरों में शिफ्ट कर रही हैं। इससे स्थानीय युवाओं को अपने घर के पास ही बेहतरीन पैकेज पर नौकरियां मिल रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 शहरों में नौकरियों के अवसर पिछले साल की तुलना में 30% तक बढ़े हैं।
महिला सशक्तिकरण और विविधता (Diversity)
कंपनियों के हायरिंग एजेंडा में विविधता एक प्रमुख प्राथमिकता बन गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कई बड़ी फर्मों ने अपनी वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी को 30% से बढ़ाकर 35% करने का लक्ष्य रखा है। रिमोट वर्किंग और हाइब्रिड मॉडल ने महिलाओं के लिए करियर और घर के बीच संतुलन बनाना आसान कर दिया है, जिससे वर्कफोर्स में उनकी सक्रियता बढ़ी है।
विशेषज्ञ की सलाह: "2026 की जॉब मार्केट में बने रहने के लिए 'निरंतर सीखना' (Continuous Learning) ही एकमात्र रास्ता है। अब कोई भी डिग्री जीवन भर के रोजगार की गारंटी नहीं दे सकती, आपको हर 2-3 साल में अपनी स्किल्स को अपडेट करना होगा।"
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