पूर्वोत्तर भारत में 77वां गणतंत्र दिवस: 'अष्टलक्ष्मी' के आंगन में गूँजा राष्ट्रगान, पारंपरिक गौरव और आधुनिकता का संगम

 

गुवाहाटी/इंफाल/कोहिमा | 26 जनवरी, 2026

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों—असम, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम—में आज 77वां गणतंत्र दिवस अभूतपूर्व उत्साह और रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। 'अष्टलक्ष्मी' कहे जाने वाले इन राज्यों ने न केवल अपनी सामरिक शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी अनूठी जनजातीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का संदेश भी पूरी दुनिया को दिया।

गुवाहाटी में मुख्य समारोह: शक्ति और शांति का संदेश

असम की राजधानी गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में राज्यपाल ने तिरंगा फहराया।

  • परेड: असम पुलिस, भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों ने शानदार मार्च पास्ट किया।
  • सांस्कृतिक छटा: बिहू नर्तकों की टोली ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से मैदान में समां बांध दिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस अवसर पर राज्य की शांति और विकास की नई ऊंचाईयों का जिक्र किया।

नागालैंड और मिजोरम: परंपरा और अनुशासन

  • कोहिमा (नागालैंड): नागालैंड में पारंपरिक 'हॉर्नबिल' वेशभूषा में सजे कलाकारों ने देशभक्ति गीतों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। यहाँ की झांकियों में 'स्वदेशी कृषि' और 'नागा संस्कृति' के संरक्षण को प्रमुखता दी गई।
  • आइजोल (मिजोरम): मिजोरम में शांतिपूर्ण ढंग से गणतंत्र दिवस मनाया गया। यहाँ स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत किए गए सामूहिक वाद्य यंत्रों के संगीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मणिपुर और अरुणाचल: सीमाओं पर उत्साह

  • मणिपुर: इंफाल के कांगला किले में आयोजित समारोह में राज्य की विविधता को दर्शाने वाली कई झांकियां निकाली गईं। 'मणिपुरी रासलीला' और 'थांग-टा' (युद्ध कला) के प्रदर्शन ने समारोह की भव्यता बढ़ाई।
  • अरुणाचल प्रदेश: भारत के सबसे पूर्वी छोर पर स्थित अरुणाचल में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बीच भी तिरंगा शान से फहराया गया। यहाँ सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और 'वाइब्रेंट विलेज' कार्यक्रम की झलक झांकियों में देखी गई।

झांकियों के मुख्य विषय: एकता और विकास

पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में झांकियों के माध्यम से तीन प्रमुख संदेश दिए गए:

  • राष्ट्रीय एकता: विभिन्न जनजातियों के बीच आपसी सौहार्द और भारत के साथ उनके गहरे जुड़ाव को प्रमुखता दी गई।
  • सांस्कृतिक विविधता: हर राज्य ने अपनी विशिष्ट वेशभूषा, खान-पान और लोक कलाओं का प्रदर्शन किया।
  • कनेक्टिविटी: पूर्वोत्तर में बन रहे नए पुलों, नेशनल हाईवे और रेलवे नेटवर्क के विस्तार को तकनीकी झांकियों के जरिए दिखाया गया।

निष्कर्ष: बदलता पूर्वोत्तर

पूर्वोत्तर भारत से आज निकला यह संदेश बहुत स्पष्ट था—यह क्षेत्र अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए भी जाना जाता है। शाम होते-होते शिलांग की पहाड़ियों से लेकर त्रिपुरा के महलों तक, पूरा पूर्वोत्तर तिरंगी रोशनी से सराबोर हो गया।

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