केरल: तिरुवनंतपुरम में 77वां गणतंत्र दिवस, 'भगवान के अपने देश' में शांति और प्रकृति का उत्सव

 

तिरुवनंतपुरम | 26 जनवरी, 2026

'भगवान के अपने देश' केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आज 77वां गणतंत्र दिवस पारंपरिक गरिमा, शांति और अनूठे सांस्कृतिक अंदाज़ में मनाया गया। सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का अद्भुत संगम देखने को मिला। आज का दिन केरल की साक्षरता और प्रकृति प्रेम के संदेश को और सशक्त कर गया।

मुख्यमंत्री ने किया ध्वजारोहण, परेड में दिखी सशक्त केरल की छवि

गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत माननीय मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। राष्ट्रगान और पुलिस बैंड की धुन के बीच, केरल की जनता ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराया। राज्यपाल ने भी राजभवन में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

  • अनुशासित परेड: परेड में केरल पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस बटालियन, होमगार्ड, और एनसीसी (NCC) कैडेटों की टुकड़ियों ने भव्य मार्च पास्ट किया। उनके अनुशासित कदमों और शौर्य प्रदर्शन ने उपस्थित जनसमूह को प्रभावित किया।
  • समुद्री सुरक्षा का प्रदर्शन: चूंकि केरल एक तटीय राज्य है, इसलिए इस वर्ष समुद्री सुरक्षा बलों और तटीय पुलिस की टुकड़ियों का विशेष प्रदर्शन भी देखने को मिला, जो राज्य की रणनीतिक महत्ता को दर्शाता है।

झांकियों में 'हरित केरल' और 'शत-प्रतिशत साक्षरता' का संदेश

समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा निकाली गई आकर्षक झांकियां थीं, जिन्होंने केरल के प्रगतिशील दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया:

  • पर्यावरण संरक्षण: इस वर्ष की प्रमुख झांकी 'हरित केरलम' (हरित केरल) अभियान पर आधारित थी। इसमें प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, जल स्रोतों के पुनरुद्धार और जैविक खेती के महत्व को दर्शाया गया। हरे-भरे पेड़ों और स्वच्छ जलधाराओं का चित्रण बेहद मनोहारी था।
  • शत-प्रतिशत साक्षरता: शिक्षा विभाग की झांकी ने केरल की 100% साक्षरता दर और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को प्रदर्शित किया। इसमें डिजिटल कक्षाओं और समावेशी शिक्षा मॉडल को दर्शाया गया।
  • आयुर्वेद और पर्यटन: पर्यटन और आयुष विभाग की झांकी ने केरल के विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदिक उपचारों और शांत बैकवाटर पर्यटन को प्रस्तुत किया, जो 'ईश्वर के अपने देश' की वैश्विक पहचान हैं।

रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

परेड के बाद केरल की समृद्ध कला और संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन हुआ। स्कूली बच्चों और विभिन्न सांस्कृतिक समूहों द्वारा कथकली, मोहिनीअट्टम और ओट्टन थुल्लल जैसे पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। पारंपरिक संगीत और वाद्ययंत्रों (जैसे चेंदा) की धुन ने समारोह में एक विशेष ऊर्जा भर दी। इन रंगारंग कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्यमंत्री का संबोधन: "समावेशी विकास और सामाजिक न्याय"

मुख्यमंत्री विजयन ने अपने संबोधन में कहा कि केरल सरकार संविधान में निहित सामाजिक न्याय, समानता और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भविष्य की प्राथमिकता बताया।

शाम होते-होते, तिरुवनंतपुरम के प्रतिष्ठित सरकारी भवन और ऐतिहासिक स्थल, जैसे पद्मनाभस्वामी मंदिर और सचिवालय, तिरंगी रोशनी से जगमगा उठे, जिसने शहर में एक उत्सवपूर्ण माहौल बना दिया। यह गणतंत्र दिवस केरल के लिए शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।

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