जयपुर | 26 जनवरी, 2026
'गुलाबी नगरी' जयपुर में आज 77वां गणतंत्र दिवस राजस्थान की गौरवशाली वीरता और जीवंत लोक संस्कृति के अनूठे मेल के साथ मनाया गया। राजधानी के सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में जहाँ एक ओर आधुनिक सैन्य शक्ति का प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की पारंपरिक मरु-संस्कृति ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
वीरता और अनुशासन की हुंकार
समारोह का शुभारंभ माननीय राज्यपाल द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। तिरंगे के फहराते ही पूरा स्टेडियम 'केसरिया बालम' की धरती पर देशभक्ति के नारों से गूँज उठा।
- ऊंट और घुड़सवार दस्ते: राजस्थान की परेड की सबसे बड़ी विशेषता सीमा सुरक्षा बल (BSF) का ऊंट दस्ता रहा। सजे-धजे ऊंटों पर सवार सैनिकों के मार्च पास्ट ने रेगिस्तानी शौर्य की याद दिला दी। इसके साथ ही राजस्थान पुलिस के घुड़सवार दस्ते ने भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शानदार प्रदर्शन किया।
- परेड का नेतृत्व: राजस्थान पुलिस, आरएसी (RAC), जेल प्रहरी और एनसीसी के कैडेटों ने कदम-से-कदम मिलाकर अनुशासन की मिसाल पेश की। वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने परेड पर पुष्पवर्षा कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
झांकियों में 'पधारो म्हारे देश' की झलक
विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत झांकियों ने राजस्थान के बदलते स्वरूप और उसकी जड़ों को बखूबी पेश किया:
- मरु संस्कृति और पर्यटन: पर्यटन विभाग की झांकी में राजस्थान के किलों, हवेलियों और रेगिस्तानी मेलों को दर्शाया गया। इसमें 'पधारो म्हारे देश' की भावना के साथ राज्य को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर सशक्त दिखाया गया।
- महिला सशक्तिकरण (लाडो प्रोत्साहन): शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग की झांकियों ने प्रदेश की बेटियों की सफलता और उनके लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
- जल स्वावलंबन: ग्रामीण विकास विभाग ने जल संरक्षण की प्राचीन और आधुनिक पद्धतियों का प्रदर्शन किया, जो मरुस्थल की जीवन रेखा है।
रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
परेड के उपरांत प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने राजस्थानी संस्कृति की छटा बिखेरी। घूमर, कालबेलिया और गैर नृत्य की प्रस्तुतियों ने राजस्थान की कलात्मक समृद्धि को जीवंत कर दिया। विशेष रूप से स्कूली बच्चों द्वारा 'विकसित राजस्थान' विषय पर दी गई सामूहिक नृत्य प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।
मुख्यमंत्री का संबोधन: "संस्कृति के साथ प्रगति"
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि राजस्थान आज शौर्य के साथ-साथ सौर ऊर्जा, निवेश और शिक्षा के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। उन्होंने महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे वीरों को याद करते हुए युवाओं से प्रदेश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
शाम को जयपुर के अल्बर्ट हॉल, आमेर किले और विधानसभा भवन को भव्य रोशनी से सजाया गया। यह गणतंत्र दिवस राजस्थान के लिए अपनी परंपराओं पर गर्व करने और आधुनिकता की ओर कदम बढ़ाने का एक प्रेरणादायी अवसर रहा।
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