गणतंत्र के 77 वर्ष: देशभर में देशप्रेम का सैलाब, राज्यों में दिखी सांस्कृतिक विविधता की झलक


नई दिल्ली | 26 जनवरी, 2026

भारत ने आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास, अनुशासन और अटूट देशभक्ति के साथ मनाया। जहाँ एक ओर राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति और आधुनिक भारत की प्रगति का प्रदर्शन हुआ, वहीं देश के कोने-कोने में तिरंगे की शान ने हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया।

राज्यों में शक्ति और संस्कृति का संगम

देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में भव्य राज्य-स्तरीय समारोह आयोजित किए गए। परंपरा के अनुसार, राज्यों के राज्यपालों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इन समारोहों में मुख्यमंत्रियों सहित वरिष्ठ अधिकारी और भारी संख्या में आम जनता उपस्थित रही।

  • परेड और प्रदर्शन: राज्यों की पुलिस इकाइयों, एनसीसी कैडेटों और स्कूली छात्रों ने शानदार मार्च पास्ट किया।
  • झांकियों का आकर्षण: समारोहों का मुख्य आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा निकाली गई झांकियां रहीं, जिनमें 'विकसित भारत 2047' के संकल्प, स्थानीय कला, और डिजिटल क्रांति को बखूबी दर्शाया गया।

संविधान के प्रति निष्ठा का संदेश

ध्वजारोहण के उपरांत अपने संबोधन में राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर जोर दिया। वक्ताओं ने याद दिलाया कि गणतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि समानता और न्याय का वह संकल्प है जो हमें संविधान ने दिया है। कई राज्यों में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया गया और सुरक्षा बलों के जवानों को उनके अदम्य साहस के लिए पदक प्रदान किए गए।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक उत्सव का माहौल

  • उत्तर भारत: श्रीनगर के लाल चौक से लेकर लद्दाख की बर्फीली चोटियों तक तिरंगा लहराया गया।
  • दक्षिण भारत: तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में पारंपरिक लोक नृत्यों के साथ गणतंत्र का उत्सव मनाया गया।
  • पूर्वोत्तर: 'अष्टलक्ष्मी' कहे जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों में जैव विविधता और जनजातीय गौरव पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम पेश किए गए।

जनभागीदारी और उत्साह

सिर्फ सरकारी कार्यालयों में ही नहीं, बल्कि आवासीय सोसायटियों, मोहल्लों और ग्रामीण अंचलों में भी छोटे-बड़े स्तर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम हुए। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया, जो हाथों में तिरंगा लिए प्रभात फेरियों में शामिल हुए। शाम होते-होते देश की प्रमुख सरकारी इमारतें 'तिरंगी' रोशनी से जगमगा उठीं, जो एकता और अखंडता का जीवंत प्रतीक बनीं।

आज का यह उत्सव केवल एक ऐतिहासिक तिथि का स्मरण नहीं, बल्कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की निरंतर बढ़ती शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतिबिंब रहा।

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