City News 24 | 05 जनवरी 2026बेंगलुरु/कर्नाटक | न्यूज़ डेस्क
कर्नाटक सरकार ने राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना, "चित्रा संथे 2026", शुरू की है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस पहल की घोषणा करते हुए प्रति वर्ष 3 से 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह कदम राज्य की बढ़ती पर्यावरण संबंधी चिंताओं, जैसे प्रदूषण, जल संकट और भूमि कटाव, के जवाब में उठाया गया है।
पहल के मुख्य बिंदु
- बड़ा लक्ष्य: प्रति वर्ष 3 से 5 करोड़ पौधे लगाकर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाना।
- सामुदायिक भागीदारी: इस कार्यक्रम में सरकारी निकायों के अलावा गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नागरिक समूहों, उद्योगपतियों, और स्कूली बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- CSR प्रोत्साहन: निजी कंपनियों को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के तहत हरित परियोजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे रोजगार और सामुदायिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रमुख पर्यावरणीय कार्य योजनाएँ
सरकार ने पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है, जिसमें निम्नलिखित कदम शामिल हैं:
- वृक्षारोपण अभियान: सार्वजनिक और निजी दोनों तरह की भूमियों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना।
- वनस्पति बाध: छोटे-बड़े जल निकायों के पास वनस्पति बाध (Vegetative Barriers) बनाना।
- जागरूकता: वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए व्यापक नागरिक जागरूकता अभियान चलाना।
- हरित क्लब: स्कूलों और कॉलेजों में हरित क्लब (Green Clubs) और ट्री वार्डन (Tree Wardens) नियुक्त करना।
शहरी केंद्रों पर विशेष ध्यान
बेंगलुरु, मैसूरु, और हुब्बली-धारवाड़ जैसे प्रमुख नगरों में विशेष अभियान चलाए जाएंगे:
- सड़क किनारे वृक्षारोपण
- हरित कक्षाएं: झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में बच्चों और परिवारों के लिए पर्यावरण शिक्षा पर हरित कक्षाओं का आयोजन।
- सामुदायिक बाग़: अपराध नियंत्रण में मदद करने और पर्यावरण संतुलन बनाने के लिए सामुदायिक बाग़ों का विकास।
अपेक्षित दीर्घकालिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 'चित्रा संथे 2026' को संगठित तरीके से लागू किया जाता है, तो इसके कई सकारात्मक और लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव होंगे:
- तापमान में कमी
- वायु गुणवत्ता में सुधार
- प्राकृतिक आपदाओं में कमी (जैसे बाढ़ और सूखे)
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की निजी जिम्मेदारी है।
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