इंदौर शूटिंग एकेडमी कांड: ट्रेनिंग की आड़ में छात्राओं के यौन शोषण के गंभीर आरोप, धर्मांतरण के दबाव तक पहुंची जांच

 

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में मई 2025 में सामने आया Dream Olympic Shooting Academy मामला उस समय शहर के सबसे गंभीर और चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया था। एकेडमी के संचालक और शूटिंग कोच मोहसिन खान के खिलाफ एक के बाद एक कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म, ब्लैकमेल, धमकी और प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए। एक मामले में कथित अपराध के समय नाबालिग रही पीड़िता ने धर्म परिवर्तन का दबाव डालने और मांस खाने के लिए मजबूर करने जैसे आरोप भी लगाए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी।

शूटिंग सीखने आई छात्रा की शिकायत से खुला मामला

मामला उस समय सामने आया जब एक पूर्व छात्रा ने इंदौर पुलिस से शिकायत की। छात्रा के मुताबिक उसने 2021 से नवंबर 2023 तक Dream Olympic Shooting Academy में प्रशिक्षण लिया था।

उसने आरोप लगाया कि नवंबर 2023 में अभ्यास के दौरान मोहसिन ने राइफल पकड़ने का तरीका सिखाने के बहाने उसे अनुचित तरीके से छुआ। विरोध करने पर कथित तौर पर उसके शूटिंग करियर को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। डर के कारण वह काफी समय तक शिकायत नहीं कर सकी, लेकिन बाद में परिवार को जानकारी देकर पुलिस के पास पहुंची। इसके बाद मोहसिन को गिरफ्तार किया गया।

पहली शिकायत सामने आने के बाद दूसरी महिलाएं भी पुलिस तक पहुंचीं और मामला लगातार बड़ा होता चला गया।

एक के बाद एक दर्ज हुईं FIR

23 मई 2025 तक दो अन्य युवतियों की शिकायत पर भी मोहसिन के खिलाफ मामले दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आई। इनमें दुष्कर्म और छेड़छाड़ के आरोप शामिल थे। एक शिकायत में SC/ST Act के प्रावधान भी लगाए गए।

इसके बाद 27 मई तक मोहसिन के खिलाफ पांचवीं FIR दर्ज हो चुकी थी। यह FIR सबसे गंभीर मामलों में से एक थी क्योंकि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 2020 में जब वह नाबालिग थी, तब मोहसिन और दो अन्य आरोपियों ने उसे बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस मामले में POCSO Act और मध्य प्रदेश Freedom of Religion Act के प्रावधान भी लगाए थे।

जून 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार जांच बढ़ने के साथ मोहसिन अलग-अलग मामलों में दुष्कर्म, गैंगरेप, छेड़छाड़, धोखाधड़ी और धमकी सहित कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहा था।

धर्मांतरण के दबाव का भी आरोप

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू एक पीड़िता द्वारा लगाए गए धर्मांतरण संबंधी आरोप थे।

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2020 के लॉकडाउन के दौरान उसे कई दिनों तक एक फ्लैट में बंधक रखा गया और उसके साथ यौन हिंसा की गई। उसने आरोप लगाया कि उसे अश्लील सामग्री दिखाई गई, उसकी इच्छा के विरुद्ध वीडियो बनाए गए, मांस खाने के लिए मजबूर किया गया और धर्म परिवर्तन कर एक आरोपी से विवाह करने का दबाव बनाया गया।

शिकायत में पिस्तौल दिखाकर उसे और उसकी मां को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने धर्म स्वतंत्रता कानून के तहत भी मामला दर्ज किया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे गर्म प्रेस से दागा गया।

ये सभी बातें पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनका अंतिम न्यायिक निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होना है।

मोबाइल और डिजिटल डेटा ने बढ़ाई जांच

पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मोहसिन का मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बने।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मोबाइल में महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो और चैट मिलने की बात सामने आई। पुलिस ने साइबर विशेषज्ञों की मदद से कथित रूप से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने का प्रयास भी किया।

जून में Times of India ने रिपोर्ट किया कि जांचकर्ताओं को आरोपी के मोबाइल में 100 से अधिक explicit videos मिले थे, जिनकी भी जांच की जा रही थी।

पुलिस आरोपी के संपर्कों, वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की भी जांच कर रही थी।

क्या 100 से ज्यादा लड़कियां शिकार हुईं?

यही इस मामले का वह हिस्सा है जिस पर रिपोर्टिंग करते समय सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है।

मई 2025 में प्रकाशित कुछ रिपोर्टों में मोहसिन पर 100 से अधिक लड़कियों के यौन शोषण के आरोप लगने और पुलिस द्वारा एकेडमी से जुड़ी 41 लड़कियों की सूची तैयार कर उनसे संपर्क/पूछताछ करने की तैयारी का उल्लेख किया गया था।

वहीं स्थानीय हिंदू संगठनों ने संख्या इससे भी अधिक होने का दावा किया था। India Today की रिपोर्ट के अनुसार बजरंग दल की स्थानीय इकाई ने दावा किया था कि आरोपी के फोन के डेटा से 150 से ज्यादा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाए जाने का संकेत मिलता है। लेकिन उस समय पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही थी।

इसलिए “100 से ज्यादा हिंदू लड़कियों से दुष्कर्म सिद्ध हो चुका हैकहना सही नहीं होगा। इतनी बड़ी संख्या को लेकर दावे जरूर सामने आए थे, लेकिन हर मामले में FIR, पीड़िता का बयान और अदालत में अपराध सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं।

सामने आया कथित वीडियो

मई के आखिर में एक वीडियो को लेकर भी खबर सामने आई। Amar Ujala की रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में मोहसिन कई लड़कियों के साथ संबंध होने और अलग-अलग जगहों की लड़कियों के साथ गलत काम करने की बात करता दिखाई दिया। इसी दौरान पुलिस की विशेष टीम तकनीकी साक्ष्य जुटाने और बैंक खातों की जांच में लगी थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मोबाइल, लैपटॉप और DVR जैसे उपकरणों से भी तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे थे।

वर्षों बाद क्यों सामने आईं शिकायतें?

इस मामले में कई शिकायतें कथित घटनाओं के काफी समय बाद दर्ज हुईं।

एक शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी की धमकियों और करियर खराब होने के डर से वह पहले पुलिस तक नहीं पहुंच सकी। वहीं 2020 की कथित घटना से जुड़ी पीड़िता ने कहा कि वह आरोपियों से इतनी भयभीत थी कि उसने वर्षों तक घटना की जानकारी नहीं दी। बाद में मोहसिन से जुड़े दूसरे मामले समाचारों में आने के बाद उसने अपने पति को बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

इस तरह पहली शिकायत के बाद अन्य महिलाओं के सामने आने से जांच का दायरा बढ़ता गया।

धर्म के आधार पर पूरे मामले को देखना कितना सही?

इस प्रकरण में धर्मांतरण का आरोप गंभीर है और इसी वजह से Freedom of Religion Act की धाराएं भी एक FIR में लगाई गईं। कुछ हिंदू संगठनों ने मामले कोलव जिहादसे भी जोड़ा।

लेकिन उपलब्ध पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर किसी पूरे धार्मिक समुदाय को इस अपराध से जोड़ना उचित नहीं होगा। आपराधिक जिम्मेदारी उन व्यक्तियों की निर्धारित होगी जिनके खिलाफ आरोप और साक्ष्य हैं।

अदालत तय करेगी अंतिम सच

इंदौर शूटिंग एकेडमी मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें सामान्य छेड़छाड़ से लेकर दुष्कर्म, नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, ब्लैकमेल, धमकी और धर्मांतरण के दबाव तक के आरोप सामने आए।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, अलग-अलग शिकायतों पर FIR दर्ज कीं और डिजिटल उपकरणों तथा बैंक खातों तक की जांच की। जून 2025 तक मामला कई गंभीर आरोपों तक पहुंच चुका था।

लेकिन कानूनी दृष्टि से यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि FIR में आरोप लगना और अदालत में अपराध साबित होना एक बात नहीं है। अंतिम रूप से कौन-सा आरोप प्रमाणित होता है, यह जांच, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगा।

फिर भी इस मामले ने एक गंभीर सवाल जरूर खड़ा कियायदि प्रशिक्षण और बेहतर करियर का सपना लेकर किसी संस्थान में पहुंचने वाली छात्राओं के साथ कोई प्रशिक्षक अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करता है, तो ऐसी संस्थाओं में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी मजबूत है?

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