लखनऊ/नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026। उत्तर
प्रदेश
कैडर
की
चर्चित
IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के
भारतीय
प्रशासनिक सेवा
से
इस्तीफे ने
प्रशासनिक हलकों
के
साथ-साथ प्रदेश की
राजनीति में
भी
हलचल
पैदा
कर
दी
है।
2013 बैच
की
IAS अधिकारी दिव्या
मित्तल
ने
करीब
13 वर्षों
की
सेवा
के
बाद
30 अगस्त
को
स्वेच्छा से
इस्तीफा देने
की
घोषणा
की।
लेकिन
उनके
इस
फैसले
के
तुरंत
बाद
एक
नया
सवाल
राजनीतिक गलियारों में
चर्चा
का
विषय
बन
गया
है—क्या दिव्या
मित्तल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती हैं?
इस
सवाल
को
हवा
एक
भाजपा
नेता
के
उस
दावे
से
मिली
है,
जिसमें
कहा
गया
कि
इस्तीफा देने
से
पहले
दिव्या
मित्तल
ने
दिल्ली
में
कांग्रेस नेता
राहुल
गांधी
से
मुलाकात की
थी।
हालांकि, इस
कथित
मुलाकात की
अभी
तक
किसी
स्वतंत्र या
आधिकारिक स्रोत
से
पुष्टि
नहीं
हुई
है।
दूसरी
ओर
दिव्या
मित्तल
स्वयं
फिलहाल
राजनीति में
प्रवेश
की
बात
से
इनकार
कर
चुकी
हैं।
इसलिए
उनके
किसी
राजनीतिक दल
में
शामिल
होने
या
चुनाव
लड़ने
की
बात
को
फिलहाल
संभावना और राजनीतिक अटकल के
रूप
में
ही
देखा
जाना
चाहिए।
30
अगस्त को अचानक सामने आया इस्तीफा
दिव्या
मित्तल
ने
सोशल
मीडिया
के
जरिए
अपने
फैसले
की
जानकारी देते
हुए
अपने
13 वर्षों
के
प्रशासनिक सफर
को
याद
किया।
उन्होंने स्पष्ट
किया
कि
वह
अपनी
इच्छा
से
IAS छोड़
रही
हैं।
इस्तीफे के
समय
वह
उत्तर
प्रदेश
सरकार
के
राजस्व
विभाग
में
विशेष
सचिव
के
पद
पर
तैनात
थीं।
उन्होंने मई
2026 में
इस
पद
का
कार्यभार संभाला
था।
इस्तीफे के
बाद
उन्होंने अपने
फैसले
को
लेकर
कहा
कि
इसके
पीछे
कोई
अचानक
हुई
घटना
या
कोई
एक
'ट्रिगर
मोमेंट'
नहीं
है।
उनके
अनुसार
वह
पिछले
कुछ
समय
से
अपनी
जिंदगी
की
प्राथमिकताओं, रुचियों और
परिवार
के
बारे
में
विचार
कर
रही
थीं।
उन्होंने IAS की
नौकरी
को
अपनी
जिंदगी
का
एक
महत्वपूर्ण अध्याय
बताया,
लेकिन
पूरी
जिंदगी
नहीं।
यही
कारण
है
कि
उनके
अगले
कदम
को
लेकर
उत्सुकता बढ़
गई
है।
दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात का दावा
मामले
में
सबसे
बड़ा
राजनीतिक मोड़
तब
आया
जब
भाजपा
से
जुड़े
अधिवक्ता और
प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने
सोशल
मीडिया
पर
दावा
किया
कि
दिव्या
मित्तल
ने
इस्तीफे से
पहले
राहुल
गांधी
से
मुलाकात की
थी।
उन्होंने इस
कथित
मुलाकात को
सीधे
2027 के
उत्तर
प्रदेश
विधानसभा चुनाव
से
जोड़ते
हुए
आरोप
लगाया
कि
इसके
पीछे
राजनीतिक उद्देश्य हो
सकता
है।
यह
दावा
महत्वपूर्ण जरूर
है,
लेकिन
यहां
तथ्य और राजनीतिक दावे के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।
अभी
तक
ऐसी
कोई
स्वतंत्र रूप
से
सत्यापित तस्वीर,
आधिकारिक बयान
या
कांग्रेस अथवा
दिव्या
मित्तल
की
ओर
से
पुष्टि
सामने
नहीं
आई
है
जिससे
निश्चित रूप
से
कहा
जा
सके
कि
उनकी
राहुल
गांधी
से
ऐसी
मुलाकात हुई
थी
और
उसी
मुलाकात का
उनके
इस्तीफे से
कोई
संबंध
था।
NDTV की
रिपोर्ट ने
भी
इस
दावे
को
अपुष्ट
बताया
है।
इसलिए
यह
लिखना
कि
राहुल गांधी से मिलने के बाद ही दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने के लिए इस्तीफा दिया, फिलहाल
उपलब्ध
तथ्यों
से
साबित
नहीं
होता।
क्या 2027 में चुनाव लड़ सकती हैं दिव्या मित्तल?
उत्तर
प्रदेश
विधानसभा चुनाव
2027 में
होने
हैं
और
चुनाव
से
पहले
राजनीतिक दल
नए
तथा
चर्चित
चेहरों
को
अपने
साथ
जोड़ने
की
कोशिश
करेंगे। ऐसे
में
एक
लोकप्रिय पूर्व
IAS अधिकारी का
नाम
राजनीतिक चर्चाओं में
आना
असामान्य नहीं
है।
ThePrint की रिपोर्ट के
मुताबिक राजनीतिक और
नौकरशाही हलकों
में
उनके
संभावित राजनीतिक प्रवेश
को
लेकर
चर्चा
है।
रिपोर्ट में
सूत्रों के
हवाले
से
मिर्जापुर या देवरिया जैसे
क्षेत्रों से
संभावित राजनीतिक शुरुआत
की
अटकल
का
उल्लेख
किया
गया
है।
इन
दोनों
जिलों
से
दिव्या
मित्तल
का
प्रशासनिक जुड़ाव
रहा
है।
हालांकि दिव्या
मित्तल
की
ओर
से
चुनाव
लड़ने
या
किसी
पार्टी
में
शामिल
होने
की
पुष्टि
नहीं
की
गई
है।
मिर्जापुर विशेष
रूप
से
महत्वपूर्ण हो
सकता
है
क्योंकि यहां
जिलाधिकारी रहते
हुए
दिव्या
मित्तल
काफी
चर्चित
हुई
थीं।
उनके
तबादले
के
समय
स्थानीय लोगों
द्वारा
उन्हें
भावुक
विदाई
दिए
जाने
की
तस्वीरें और
वीडियो
भी
चर्चा
में
रहे
थे।
राजनीति के सवाल पर दिव्या मित्तल ने क्या कहा?
सबसे
महत्वपूर्ण पक्ष
स्वयं
दिव्या
मित्तल
का
है।
NDTV से बातचीत
में
उनसे
इस्तीफे के
बाद
राजनीति में
आने
के
बारे
में
पूछा
गया
तो
उन्होंने फिलहाल इससे इनकार किया। वहीं
ThePrint से
बातचीत
में
उन्होंने कहा
कि
भविष्य
को
लेकर
अभी
कोई
योजना
तय
नहीं
है
और
सही
समय
आने
पर
वह
इस
बारे
में
बात
करेंगी।
इसलिए
वर्तमान स्थिति
थोड़ी
दिलचस्प है।
एक
तरफ
वह
तत्काल
राजनीति में
प्रवेश
से
इनकार
कर
रही
हैं,
दूसरी
तरफ
उन्होंने अपने
भविष्य
के
विकल्पों को
लेकर
कोई
विस्तृत घोषणा
भी
नहीं
की
है।
Indian Express की रिपोर्ट में
सूत्रों के
हवाले
से
यह
भी
कहा
गया
है
कि
वह
अकादमिक क्षेत्र और लेखन की
ओर
बढ़
सकती
हैं।
यानी
राजनीति के
अलावा
दूसरे
विकल्प
भी
उनके
सामने
हो
सकते
हैं।
IIT
दिल्ली से IAS तक का शानदार सफर
दिव्या
मित्तल
की
शैक्षणिक और
प्रशासनिक पृष्ठभूमि भी
उनके
प्रति
लोगों
की
दिलचस्पी की
बड़ी
वजह
है।
हरियाणा के
रेवाड़ी से
आने
वाली
दिव्या
मित्तल
ने
IIT दिल्ली
से
इंजीनियरिंग और
IIM बेंगलुरु से
MBA की
पढ़ाई
की।
इसके
बाद
उन्होंने लंदन
में
कॉर्पोरेट सेक्टर
में
काम
किया।
बाद
में
नौकरी
छोड़कर
भारत
लौटीं
और
UPSC की
तैयारी
शुरू
की।
पहले
उनका
चयन
IPS में
हुआ
और
अगले
प्रयास
में
वह
IAS बनीं।
उत्तर
प्रदेश
में
संत
कबीर
नगर,
मिर्जापुर और
देवरिया सहित
विभिन्न जिलों
में
उनकी
प्रशासनिक जिम्मेदारियां रहीं।
खास
तौर
पर
मिर्जापुर के
दूरस्थ
लहुरियादह गांव
में
पाइप
से
पानी
पहुंचाने की
परियोजना के
कारण
उनकी
काफी
चर्चा
हुई
थी।
यही
प्रशासनिक पहचान
भविष्य
में
यदि
वह
राजनीति चुनती
हैं
तो
उनकी
सबसे
बड़ी
राजनीतिक पूंजी
भी
बन
सकती
है।
अखिलेश यादव के बयान से मामला और राजनीतिक
दिव्या
मित्तल
के
इस्तीफे पर
समाजवादी पार्टी
प्रमुख
अखिलेश
यादव
ने
भी
प्रतिक्रिया दी
है।
उन्होंने उत्तर
प्रदेश
सरकार
पर
निशाना
साधते
हुए
दावा
किया
कि
मौजूदा
व्यवस्था में
ईमानदार अधिकारियों के
लिए
काम
करना
मुश्किल हो
रहा
है।
इस
बयान
के
बाद
मामला
केवल
एक
IAS अधिकारी के
व्यक्तिगत इस्तीफे तक
सीमित
नहीं
रहा,
बल्कि
सत्ता
पक्ष
और
विपक्ष
के
बीच
राजनीतिक बहस
का
हिस्सा
भी
बन
गया।
एक
तरफ
भाजपा
से
जुड़े
नेता
राहुल
गांधी
से
कथित
मुलाकात और
2027 चुनाव
का
सवाल
उठा
रहे
हैं,
दूसरी
तरफ
विपक्ष
सरकार
की
कार्यप्रणाली को
लेकर
सवाल
कर
रहा
है।
2027
का कनेक्शन—संभावना कितनी मजबूत?
दिव्या
मित्तल
के
इस्तीफे का
समय
निश्चित रूप
से
राजनीतिक अटकलों
के
लिए
जमीन
तैयार
करता
है।
उत्तर
प्रदेश
विधानसभा चुनाव
में
अब
ज्यादा
समय
नहीं
बचा
है।
उनके
पास
प्रशासनिक अनुभव
है,
आम
लोगों
के
बीच
पहचान
है
और
मिर्जापुर तथा
देवरिया जैसे
जिलों
से
उनका
पुराना
जुड़ाव
रहा
है।
इसलिए
यदि
भविष्य
में
वह
राजनीति में
प्रवेश
करती
हैं
तो
यह
पूरी
तरह
अप्रत्याशित घटना
नहीं
होगी।
लेकिन
आज की तारीख में तीन बातें स्पष्ट रूप से अलग रखनी होंगी—दिव्या मित्तल का इस्तीफा एक पुष्ट तथ्य है; राहुल गांधी से मुलाकात भाजपा नेता का दावा है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है; और 2027 में कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ना फिलहाल केवल अटकल है।
दिव्या
मित्तल
ने
स्वयं
राजनीति में
आने
की
पुष्टि
नहीं
की
है।
ऐसे
में
उन्हें
अभी
से
कांग्रेस का
संभावित उम्मीदवार बताना
जल्दबाजी होगी।
फिर
भी
उनका
एक
वाक्य
आगे
की
कहानी
को
दिलचस्प बनाए
रखता
है—भविष्य के बारे
में
वह
समय आने पर बात करेंगी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि IAS से औपचारिक रूप से अलग होने के बाद दिव्या मित्तल का अगला पड़ाव शिक्षा और लेखन होता है, सामाजिक क्षेत्र होता है या फिर 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति।
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