बाली में हिंदू पर्व ‘न्येपी’ का अपमान पड़ा भारी: स्विस पर्यटक को एक साल की जेल, सोशल मीडिया पोस्ट से मचा था आक्रोश

 

बाली, इंडोनेशिया। दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल इंडोनेशिया के बाली द्वीप से धार्मिक परंपराओं के सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। बाली के पवित्र हिंदू पर्व न्येपी’ (Nyepi), जिसे ‘Day of Silence’ यानी मौन दिवस भी कहा जाता है, को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले 26 वर्षीय स्विस नागरिक लुजियान एंड्रिन ज़ग्रागेन (Luzian Andrin Zgraggen) को अदालत ने एक साल की जेल की सजा सुनाई है।

20 अगस्त 2026 को Denpasar District Court ने ज़ग्रागेन को इंडोनेशिया के कानून के तहत धार्मिक आस्था का अपमान करने वाली सामग्री प्रसारित करने का दोषी पाया। अभियोजन पक्ष ने उसके लिए 15 महीने की जेल की मांग की थी, लेकिन अदालत ने कई परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे 12 महीने की सजा सुनाई।

आखिर उसने कहा क्या था?

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्विस पर्यटक द्वारा Instagram पर पोस्ट की गई सामग्री थी।

रिपोर्टों के अनुसार, न्येपी के दौरान उसे जिस विला में ठहराया गया था, वहाँ के कर्मचारियों ने पहले ही बता दिया था कि इस पवित्र दिन पर लोगों को अपने घर या होटल-विला से बाहर नहीं निकलना चाहिए। इसके बावजूद वह बाहर निकला और खाली समुद्र तट की ओर चला गया।

उसने इस दौरान वीडियो बनाए और उन्हें अपने Instagram अकाउंट पर पोस्ट किया।

एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार उसने अपनी पोस्ट में लिखा:

“a day of silence where you’re not allowed to go outside in Bali is pretty peaceful outside:)”

यानी मोटे तौर पर हिंदी में इसका अर्थ था

बाली में मौन का वह दिन, जब आपको बाहर जाने की अनुमति नहीं हैबाहर काफी शांति है :)”

लेकिन मामला केवल इस वाक्य तक सीमित नहीं था। वीडियो में उसने न्येपी की परंपरा को “crazy” यानीपागलपन/अजीब बताया और पर्व तथा स्थानीय नियमों को लेकर अपशब्द (expletive) का भी इस्तेमाल किया। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने गाली का पूरा शब्द प्रकाशित करने के बजाय केवल यह बताया है कि उसने एक expletive का प्रयोग किया था। इसलिए अपुष्ट या मनगढ़ंत गाली को उसके नाम से जोड़ना सही नहीं होगा।

क्या हैन्येपीऔर बाली में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

न्येपी बाली के हिंदू समुदाय का बेहद पवित्र धार्मिक पर्व है। इसे Balinese New Year के रूप में मनाया जाता है और यह Saka calendar से जुड़ा हुआ है।

इस दिन पूरे बाली में लगभग 24 घंटे तक असाधारण शांति रहती है। लोगों से घरों में रहने, कामकाज बंद रखने, बाहर निकलने और मनोरंजन से दूर रहने की अपेक्षा की जाती है।

न्येपी के दौरान बाजार, दुकानें, कार्यालय, कैफे, बार और रेस्तरां सहित अधिकांश सार्वजनिक गतिविधियाँ बंद रहती हैं। यहां तक कि बाली का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बंद हो जाता है। इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया जाता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ये नियम केवल हिंदुओं के लिए नहीं हैं। न्येपी के दौरान बाली में मौजूद स्थानीय लोगों और विदेशी पर्यटकों सहित सभी से इन प्रतिबंधों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है, चाहे उनका धर्म या राष्ट्रीयता कुछ भी हो।

चेतावनी मिलने के बावजूद बाहर निकला पर्यटक

अदालत में सामने आई जानकारी के अनुसार ज़ग्रागेन जिस विला में रह रहा था, वहाँ के कर्मचारियों ने उसे न्येपी से जुड़े प्रतिबंधों की जानकारी दी थी।

इसके बावजूद वह अपने आवास से निकल गया।

उसने खुद को खाली सड़कों और समुद्र तट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया। यही वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।

बाली के कई स्थानीय लोगों ने इसे केवल नियम तोड़ने की घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि अपने पवित्र धार्मिक पर्व और आस्था के प्रति अपमान के रूप में लिया।

सोशल मीडिया पर उसकी पोस्ट दोबारा साझा होने लगी और लोगों में नाराजगी बढ़ गई।

पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला?

बाली पुलिस के अनुसार 20 मार्च 2026 को साइबर अधिकारियों की नजर Instagram अकाउंट @luzzysun की पोस्ट पर पड़ी।

पोस्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पुलिस ने अकाउंट के मालिक की पहचान शुरू की।

जांच में उसकी पहचान स्विस नागरिक Luzian Andrin Zgraggen के रूप में हुई।

पुलिस ने उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया और आखिरकार उसे बाली में खोज निकाला। ANTARA की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने उसे Tumbak Bayuh, Mengwi, Badung इलाके में पाया और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस के साइबर क्राइम विभाग ले जाया गया।

इसके बाद मामला औपचारिक रूप से दर्ज किया गया और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।

अदालत ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई Denpasar District Court में हुई।

अदालत ने ज़ग्रागेन को इंडोनेशिया के 2023 Criminal Code के Article 301 के तहत दोषी माना। यह प्रावधान सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न माध्यमों से धार्मिक अपमान से संबंधित सामग्री के प्रसारण पर लागू हो सकता है।

फैसला सुनाते हुए पीठासीन न्यायाधीश Tjokorda Putra Budi Pastima ने कहा कि आरोपी के कृत्य ने बाली के लोगों को आहत किया, उनकी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाई और सार्वजनिक आक्रोश पैदा किया।

अदालत के अनुसार ऐसी गतिविधियाँ समाज में चिंता पैदा करने के साथ सामाजिक तनाव या संघर्ष की संभावना भी बढ़ा सकती हैं।

इसी आधार पर अदालत ने उसे एक वर्ष की जेल की सजा सुनाई।

अभियोजन ने मांगी थी 15 महीने की सजा

अभियोजन पक्ष ने स्विस नागरिक के लिए एक वर्ष तीन महीने यानी 15 महीने की जेल की मांग की थी।

हालांकि अदालत ने सजा तय करते समय कुछ नरम परिस्थितियों पर भी विचार किया।

उसका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, अदालत में उसका व्यवहार उचित रहा, उसने अपने किए को स्वीकार किया और पछतावा व्यक्त किया। उसकी अपेक्षाकृत कम उम्र को भी ध्यान में रखा गया।

इन कारणों से अदालत ने अभियोजन की मांग से तीन महीने कम करते हुए 12 महीने की जेल की सजा तय की।

कोर्ट में स्विस पर्यटक ने मांगी माफी

मुकदमे के दौरान ज़ग्रागेन ने दावा किया कि उसका उद्देश्य बाली के हिंदुओं या उनके धार्मिक पर्व का अपमान करना नहीं था।

उसने अदालत को बताया कि न्येपी के दौरान सब कुछ बंद होने के कारण उसे खाना नहीं मिल रहा था। वह भूखा और परेशान था तथा प्रतिबंधों की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ पाया था।

अपने बचाव में उसने बाली के लोगों से माफी मांगते हुए कहा:

“I deeply regret what I did, I apologize to the Balinese people.”

अर्थात

मैंने जो किया उसका मुझे गहरा पछतावा है। मैं बाली के लोगों से माफी मांगता हूं।

रिपोर्टों के मुताबिक उसने एक साल की सजा स्वीकार कर ली और फैसले के खिलाफ अपील नहीं करने का निर्णय लिया।

विदेशी पर्यटकों के लिए भी स्पष्ट संदेश

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बाली दुनिया के सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में से एक है और हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक यहां आते हैं।

पर्यटन स्थल होने के बावजूद बाली की स्थानीय संस्कृति और हिंदू धार्मिक परंपराओं का वहां के सामाजिक जीवन में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है।

अदालत ने अपने फैसले के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि किसी दूसरे देश में जाने वाले व्यक्ति को वहां के कानून, धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना आवश्यक है।

यह मामला सिर्फ एक पर्यटक के बाहर निकलने तक सीमित नहीं रहा। चेतावनी मिलने के बावजूद न्येपी के नियम तोड़ना, फिर उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डालना और पवित्र परंपरा को “crazy” बताते हुए अपशब्द का इस्तेमाल करना मामले को गंभीर बनाने वाले प्रमुख कारण बने।

आखिरकार सोशल मीडिया पर कुछ क्षणों की पोस्ट स्विस पर्यटक को बेहद महंगी पड़ीऔर बाली की अदालत ने उसे एक साल के लिए जेल भेज दिया।

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