नई दिल्ली | पर्यावरण ब्यूरो भारत
मौसम
विज्ञान विभाग
(IMD) ने
देश
के
कई
हिस्सों में
सामान्य से
अधिक
तापमान
दर्ज
किए
जाने
के
बाद
'हीटवेव'
(उष्ण
लहर)
का
अलर्ट
जारी
किया
है।
आमतौर
पर
मार्च
के
अंत
में
शुरू
होने
वाली
गर्मी
ने
इस
बार
फरवरी
के
मध्य
में
ही
अपने
तेवर
दिखाने
शुरू
कर
दिए
हैं।
मैदानी
इलाकों
और
मध्य
भारत
के
कुछ
राज्यों में
पारा
सामान्य से
3°C से 5°C तक ऊपर पहुंच
गया
है,
जिसने
वैज्ञानिकों और
सरकार
की
चिंता
बढ़ा
दी
है।
किन राज्यों में बढ़ा खतरा?
मौसम
विभाग
की
रिपोर्ट के
अनुसार,
राजस्थान, गुजरात,
मध्य
प्रदेश
और
महाराष्ट्र के
कुछ
हिस्सों में
तापमान
में
भारी
उछाल
देखा
जा
रहा
है।
- तटीय
क्षेत्र: कोंकण और गोवा के साथ-साथ तटीय कर्नाटक में 'हॉट एंड ह्यूमिड' (गर्म और उमस भरा) मौसम रहने की चेतावनी दी गई है।
- उत्तर
भारत: उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में भी आने वाले दिनों में तापमान में 2°C
से 3°C
की क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र पर 'हीट स्ट्रेस' का साया
समय
से
पहले
बढ़
रही
यह
गर्मी
देश
की
खाद्य
सुरक्षा और
कृषि
क्षेत्र के
लिए
एक
बड़ी
चुनौती
बन
सकती
है।
- गेहूं
की फसल: फरवरी का यह समय गेहूं की फसल के पकने
(Grain Filling Stage) के लिए महत्वपूर्ण होता है। अचानक बढ़ते तापमान से दाने सिकुड़ सकते हैं, जिससे पैदावार में 15% से 25%
तक की कमी आ
सकती है।
- बागवानी: आम और नींबू जैसे फलों के पेड़ों में फूल झड़ने (Flower Drop) की समस्या बढ़ सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का डर है।
- पशुधन: विशेषज्ञों ने पशुओं में 'हीट स्ट्रेस' की चेतावनी दी है, जिससे दुग्ध उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है।
स्वास्थ्य सलाह: लू से बचाव के उपाय
बढ़ते
तापमान
को
देखते
हुए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने
नागरिकों के
लिए
विशेष
गाइडलाइंस जारी
की
हैं:
- हाइड्रेशन: दिन भर पर्याप्त पानी पिएं। ओआरएस (ORS), नींबू पानी और छाछ का सेवन बढ़ाएं।
- आउटडोर
एक्सपोजर: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें।
- पहनावा: हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें।
सरकार की तैयारी और 'हीट एक्शन प्लान'
केंद्र
और
राज्य
सरकारों ने
अपने
'हीट
एक्शन
प्लान'
(HAPs) को
सक्रिय
कर
दिया
है।
- अस्पतालों
में विशेष वार्ड: जिला स्तर पर अस्पतालों
को हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए अलग बिस्तर आरक्षित करने और ज़रूरी दवाओं का स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- कूलिंग
सेंटर: शहरी इलाकों में सार्वजनिक
स्थानों पर पानी के स्टॉल और ठंडी छाया वाले आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं।
क्लाइमेट विशेषज्ञों की चेतावनी
जलवायु
विशेषज्ञों का
कहना
है
कि
'एल
नीनो'
के
प्रभाव
और
ग्लोबल
वार्मिंग के
चलते
भारत
में
'एक्सट्रीम वेदर
इवेंट्स' (चरम
मौसमी
घटनाएं)
अब
अधिक
बार
और
अधिक
तीव्रता के
साथ
होंगी।
"अब हमें केवल आपातकालीन
राहत नहीं, बल्कि 'क्लाइमेट-स्मार्ट' कृषि और लंबी अवधि के शहरी नियोजन की आवश्यकता है ताकि हम इस बढ़ते तापमान के साथ तालमेल बिठा सकें।" — वरिष्ठ
जलवायु विज्ञानी
निष्कर्ष: फरवरी की यह गर्मी एक चेतावनी है कि हमें पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) की दिशा में और तेज़ी से काम करना होगा।
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