तत्काल और इमरजेंसी कोटा खत्म करने की मांग खारिज, याचिकाकर्ता की गैरहाजिरी में कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला

 

डेस्क रिपोर्ट | नई दिल्ली | 13 फरवरी 2026

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भारतीय रेलवे की तत्काल और इमरजेंसी कोटा टिकट प्रणाली को समाप्त करने की मांग वाली जनहित याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। अदालत ने यह फैसला याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति के आधार पर सुनाया। सुनवाई के दौरान न तो याचिकाकर्ता स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और न ही उनकी ओर से कोई वकील पेश हुआ।

यह याचिका गौरीशंकर एस बनाम भारत संघ मामले में दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि रेलवे की तत्काल और इमरजेंसी कोटा योजनाएं केवल कार्यकारी आदेशों के माध्यम से लागू की गई हैं और इन्हें रेलवे अधिनियम 1989 के तहत संसद की विधायी मंजूरी प्राप्त नहीं है। याचिका में इन योजनाओं को असंवैधानिक बताते हुए इन्हें समाप्त करने की मांग की गई थी।

मामले की पहली सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति सी.एम. पूनाचा की खंडपीठ के समक्ष हुई। हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता को स्वयं उपस्थित होकर अपनी दलीलें रखने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, जब शुक्रवार सुबह अदालत में मामले को पुकारा गया, तब याचिकाकर्ता या उनकी ओर से कोई भी मौजूद नहीं था।

अदालत ने संक्षिप्त आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। अदालत ने मामले के कानूनी तर्कों या याचिका के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि टिकट रद्द करने और रिफंड से जुड़े नियमों में व्यापक सुधार किया जाए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया को लेकर प्रश्न उठते हैं।

अदालत के इस आदेश के बाद तत्काल और इमरजेंसी कोटा प्रणाली पहले की तरह जारी रहेगी। चूंकि याचिका अनुपस्थिति के कारण खारिज की गई है, इसलिए याचिकाकर्ता भविष्य में उचित प्रक्रिया के तहत दोबारा आवेदन कर सकते हैं या नई याचिका दायर कर सकते हैं।

फिलहाल, इस मामले में रेलवे की मौजूदा टिकट प्रणाली में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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