नई दिल्ली | कृषि डेस्क, दिनांक: 6 फ़रवरी, 2026
देश के कृषि-खेत में आज ताज़ा हलचलें चल रही हैं, जिनमें किसान संघ, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के बीच नीति-निर्णय, प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव और आर्थिक सहायता से जुड़ी कई बड़ी खबरें सामने आईं हैं। कृषि क्षेत्र सीधे तौर पर करोड़ों किसानों की आजीविका का स्रोत है, इसलिए इन घटनाओं का असर व्यापक रूप से देखने को मिल रहा है।
सबसे पहले, संसद में कृषि मंत्री ने जानकारी दी है कि अब तक देश में कुल 8 करोड़ 47 लाख से अधिक किसान पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं, और वर्ष 2026-27 तक यह संख्या बढ़ाकर 11 करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। किसान पहचान पत्र के ज़रिये किसानों को सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ सीधे मिलने में मदद मिलती है, जिससे कृषि सहायता प्रणाली अधिक पारदर्शी और असरदार होती है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है: दो केंद्रीय कृषि योजनाओं — प्रधान मंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) और कृषोन्नति योजना — को एक एकीकृत छत्र योजना में विलय करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे राज्यों को कृषि क्लस्टर और ज़मीन-विशिष्ट जरूरतों के अनुसार लचीला संचालन करने में मदद मिलेगी। समिति टिप्पणी प्रक्रिया के बाद यह प्रस्ताव लागू होगा।
हालाँकि राष्ट्रीय स्तर पर ये सकारात्मक संकेत हैं, स्थानीय स्तर पर फिर भी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। उत्तर महाराष्ट्र में बिना मौसम के अचानक हुई बारिश और तेज़ हवाओं ने रबी फसलों को भारी नुक़सान पहुँचाया है, और लगभग 24,162 हेक्टेयर ज़मीन पर फसलें प्रभावित हुई हैं। इस दुर्घटना से लगभग 29,000 से ज़्यादा किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है, खासकर जालौन और धुले जिलों में। इससे कृषि-आधार वाले इलाक़ों में चिंता की लहर फैल गई है।
राज्य स्तर पर, केरल सरकार ने कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कृषि-उद्योग सहयोग कार्यक्रमों को आमंत्रित किया है, जिसमें किसान उत्पादक कंपनियों और कृषि-व्यवसायों के बीच साझेदारी बढ़ाने की योजना शामिल है। यह तीन चरणों में लागू होने वाला एक बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य विपणन और मूल्य वर्धन के अवसरों को विस्तृत करना है।
राज्य सरकारों से अच्छी खबर यह है कि बिहार का नया बजट 2026-27 किसान सम्मान निधि में बड़ा संशोधन लेकर आया है। इसमें किसानों को मिलने वाली सहायता राशि ₹6,000 की जगह अब ₹9,000 करने का निर्णय लिया गया है, जिससे राज्य के किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहारा मिलेगा।
केंद्रीय स्तर पर भारतीय कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को विदेशी व्यापार समझौते में पूरी तरह सुरक्षित बताया गया है, जिससे यह संदेश दिया गया है कि कृषि क्षेत्र के हितों को समझौते के दौरान किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी सावधानी बरती गई है।
इन राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय निर्णयों के बीच, कई राज्यों में किसानों की आर्थिक सहायता जैसे ऋण माफी के लिए उच्चाधिकार समितियों का विस्तार भी किया जा रहा है, जिससे किसानों के जीवन पर दबाव कम हो सके और उनकी आर्थिक दिक़्क़तों का समाधान निकाला जा सके।
कुल मिलाकर, भारत के कृषि परिदृश्य में अभी एक ही प्रकार की तस्वीर नहीं है। नीति-निर्माण, पहचान पत्र वितरण और वित्तीय सहायता जैसे सकारात्मक पहलें चल रही हैं, वहीं मौसम की अप्रत्याशित मार और स्थानीय असर किसानों के सामने गंभीर चुनौतियाँ बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ये नीतियाँ ज़मीन पर कितना असर दिखाती हैं और कृषि-समर्थन नेटवर्क किसानों तक कितनी प्रभावी रूप से पहुँच पाता है। अगर आप चाहें, मैं इन नीतियों के संभावित आर्थिक प्रभाव पर गहराई से विश्लेषण भी दे सकता हूँ।
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