वसई के रुस्तम कंपाउंड में महिला के खिलाफ गंभीर आरोप, बच्चों की सुरक्षा और दस्तावेज दुरुपयोग को लेकर शिकायतें दर्ज

 

वसई, पालघर।
वसई पूर्व के नायगांव स्थित रुस्तम कंपाउंड और आसपास के क्षेत्र में रहने वाली एक महिला के खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दी गई शिकायतों में बच्चों की संभावित उपेक्षा, आर्थिक विवाद, सामाजिक अशांति और दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। मामला अब जांच के दायरे में है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में रहने वाली पूजा सिंह नामक महिला के संबंध में कई शिकायतें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि उनके पति जौलेश्वर सिंह दहिसर स्थित एक वाइन शॉप में कार्यरत हैं और महीने में एक बार घर आकर अपनी सैलरी पत्नी को सौंपते हैं। पड़ोसियों का आरोप है कि महिला अपने पति को घर के भीतर आने की अनुमति नहीं देती और बाहर ही उनसे पैसे लेकर वापस भेज देती है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।

परिवार में दो छोटे बच्चे हैं—छह वर्षीय पुत्र आलोक और तीन वर्षीय पुत्री अनन्या। क्षेत्र के कुछ निवासियों ने आरोप लगाया है कि बच्चों की उचित देखभाल नहीं की जा रही है। शिकायत में कहा गया है कि कई बार बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता और वे लंबे समय तक कमरे में अकेले रहते हैं। यह भी आरोप है कि महिला सुबह घर से निकल जाती हैं और देर रात लौटती हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा और दिनचर्या पर प्रश्न उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के रोने-चिल्लाने की आवाजें अक्सर सुनाई देती हैं और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का संदेह है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पड़ोसियों का यह भी दावा है कि यदि कोई व्यक्ति बच्चों के संबंध में प्रश्न उठाता है, तो उसे धमकी दी जाती है कि उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर भी कॉल किया गया था। टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच के पहले ही परिस्थितियां बदल दी गईं और बच्चों से स्वतंत्र रूप से बात नहीं हो सकी। इस संबंध में आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

इसी बीच, एक अलग शिकायत में दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग का मामला भी सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2025 के दौरान उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बिजली बिल की प्रतियां कथित रूप से किसी अन्य केस में गारंटी के लिए उपयोग की गईं, जबकि उन्होंने ऐसी कोई सहमति या हस्ताक्षर नहीं किए थे। इस संबंध में पालघर जिले में 20 फरवरी 2026 को एक ई-शिकायत दर्ज की गई है, जिसका विवरण नागरिक पोर्टल रिकॉर्ड में उपलब्ध है

E - Complaint - । शिकायत में पहचान की चोरी, दस्तावेज दुरुपयोग और झूठी शिकायत दर्ज कराने जैसे आरोपों का उल्लेख है। पुलिस द्वारा प्राथमिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र के निवासियों ने एक सामूहिक आवेदन के माध्यम से पुलिस से महिला के आचरण की जांच की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित महिला के खिलाफ पहले भी “चैप्टर केस” की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन व्यवहार में सुधार नहीं हुआ है। कुछ दुकानदारों और मकान मालिकों ने आर्थिक बकाया राशि का भी मुद्दा उठाया है। आरोप है कि पैसा मांगने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है।

एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि कुछ महिलाओं ने अनुचित व्यवहार और अवांछित शारीरिक संपर्क के प्रयास की शिकायत की है। आवेदन में मांग की गई है कि यदि ऐसी शिकायतें आधिकारिक रूप से दर्ज हों, तो पीड़िताओं के बयान लेकर निष्पक्ष जांच की जाए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।

क्षेत्रीय निवासियों ने यह भी कहा है कि महिला द्वारा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया जाता है, जिससे स्थानीय माहौल प्रभावित होता है। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि रात के समय कुछ घरों के दरवाजों के बाहर फूल-माला, नींबू या लाल कपड़ा जैसी वस्तुएं रखी जाती हैं, जिससे सुबह विवाद की स्थिति बनती है। इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, परंतु निवासियों ने 16 फरवरी 2026 को डायल 112 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसी भी शिकायत की जांच निष्पक्षता और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। बाल सुरक्षा, पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग और सामाजिक शांति भंग जैसे मामलों में कानून स्पष्ट है, और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि झूठी या मनगढ़ंत शिकायतें भी कानूनन दंडनीय होती हैं।

यह पूरा मामला अब जांच के अधीन है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और यदि उनके पास ठोस साक्ष्य हों तो उन्हें औपचारिक रूप से प्रस्तुत करें। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और यदि किसी प्रकार की उपेक्षा या प्रताड़ना सिद्ध होती है, तो बाल संरक्षण अधिनियम के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों को सुनकर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

ऐसे मामलों में समाज, प्रशासन और कानून—तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आरोप गंभीर हैं, परंतु अंतिम सत्य जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। कानून की प्रक्रिया ही तय करेगी कि तथ्य क्या हैं और जिम्मेदारी किसकी है।

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