डिजिटल सुरक्षा | Instagram पर MMS वायरल की घटनाएँ: साइबर अपराध, कानून और समाज पर असर

 

नई दिल्ली।
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ Instagram पर कथित MMS वायरल होने की घटनाएँ एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दा बनकर सामने आई हैं। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें महिलाओं की निजी तस्वीरें या वीडियो उनकी अनुमति के बिना साझा किए जाने का आरोप है। विशेषज्ञ इसे डिजिटल गोपनीयता का उल्लंघन और साइबर अपराध मानते हैं।

कई मामलों में यह सामग्री हैकिंग, फर्जी अकाउंट, निजी रिश्तों के दुरुपयोग या ब्लैकमेलिंग के जरिए ऑनलाइन फैलती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तेज़ रफ्तार और शेयरिंग संस्कृति के कारण कंटेंट कुछ ही घंटों में बड़े पैमाने पर फैल जाता है, जिससे पीड़ितों को मानसिक, सामाजिक और पेशेवर नुकसान झेलना पड़ता है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, भारत में बिना सहमति किसी की निजी सामग्री साझा करना आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें कड़ी सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद, पीड़ित अक्सर शर्म, डर या सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज कराने से हिचकते हैं, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार फर्जी “लिंक” या “वायरल” शीर्षक का इस्तेमाल कर यूज़र्स को ठगा जाता है। इन लिंक पर क्लिक करते ही अकाउंट हैक हो सकता है या निजी डेटा चोरी हो सकता है। ऐसे मामलों में असली पीड़ित के बजाय अफवाहें और गलत जानकारी फैलती हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ती है।

Instagram सहित प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने रिपोर्टिंग टूल्स, कंटेंट टेक-डाउन और अकाउंट सस्पेंशन जैसी व्यवस्थाएँ लागू की हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल प्लेटफॉर्म की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; यूज़र जागरूकता सबसे अहम है। मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, प्राइवेसी सेटिंग्स और संदिग्ध लिंक से दूरी—ये सभी बुनियादी सुरक्षा कदम हैं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि वायरल घटनाओं का शिकार बनने वालों को समर्थन और काउंसलिंग की आवश्यकता होती है, न कि दोषारोपण की। समाज में पीड़ित-दोषी की मानसिकता छोड़कर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

निष्कर्ष
Instagram पर MMS वायरल की घटनाएँ केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि कानून, समाज और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय हैं। सख्त कानूनी कार्रवाई, प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और यूज़र जागरूकता—इन तीनों के संतुलन से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। डिजिटल युग में गोपनीयता का सम्मान और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार ही सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

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