कृषि इनपुट में क्रांति: सरकार ने बायोस्टिमुलेंट पर QR कोड किया अनिवार्य, नकली उत्पादों पर लगेगी लगाम

 

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता (Transparency) और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। किसानों को नकली या घटिया कृषि इनपुट उत्पादों से बचाने के लिए, अब बायोस्टिमुलेंट (जैविक उर्वरक, पौध विकास नियामक आदि) उत्पादों पर क्यूआर कोड (QR Code) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला किसानों को केवल वास्तविक और प्रमाणित गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदने में मदद करेगा, जिससे फसल की उत्पादकता और किसानों का विश्वास दोनों मजबूत होंगे।

बायोस्टिमुलेंट: कृषि का बढ़ता क्षेत्र

बायोस्टिमुलेंट, खाद या उर्वरक जैसे कृषि इनपुट उत्पादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पौधे की वृद्धि, उपज और तनाव सहने की क्षमता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाते हैं। भारतीय कृषि बाजार में इन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसी के साथ नकली और अप्रमाणित उत्पादों की बिक्री भी बढ़ी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा, "नकली बायोस्टिमुलेंट केवल किसान के पैसे को बर्बाद करते हैं, बल्कि वे पूरी फसल को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। क्यूआर कोड की अनिवार्यता इस समस्या का एक तकनीक-आधारित, स्थायी समाधान है।"

कैसे काम करेगा क्यूआर कोड?

यह क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से उत्पाद का डिजिटल पहचान पत्र होगा। जब किसान अपने स्मार्टफोन से उत्पाद के पैकेट पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे, तो उन्हें तुरंत निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी:

1.      उत्पाद की प्रामाणिकता (Authenticity): यह तुरंत सत्यापित हो जाएगा कि उत्पाद वास्तविक है या नकली।

2.      विनिर्माण विवरण: उत्पाद कहाँ और कब बनाया गया है।

3.      सामग्री की जानकारी: उत्पाद में उपयोग किए गए सक्रिय तत्व और उनकी सांद्रता।

4.      उपयोग के निर्देश: सही मात्रा और तरीका जिससे उत्पाद का उपयोग करना है।

5.      सरकारी अनुमोदन: यह पुष्टि कि उत्पाद को नियामक प्राधिकरणों (Regulatory Authorities) द्वारा अनुमोदित किया गया है।

यह प्रणाली ट्रेसिबिलिटी (Traceability) को भी सुनिश्चित करेगी, जिसका अर्थ है कि सरकारी एजेंसियां और कंपनियां यह ट्रैक कर पाएंगी कि उत्पाद विनिर्माण इकाई से लेकर किसान के खेत तक कैसे पहुँचा है।

गुणवत्ता और विश्वास का पुनर्गठन

इस कदम का सीधा लाभ किसानों की आय और फसल की गुणवत्ता पर पड़ेगा। जब किसान केवल प्रमाणित इनपुट का उपयोग करेंगे, तो उन्हें अधिकतम और स्वस्थ उपज मिलेगी, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा।

इसके साथ ही, यह नई व्यवस्था उन ईमानदार और गुणवत्ता-उन्मुख उत्पादकों के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा का एक समान अवसर भी सुनिश्चित करेगी जो उच्च मानकों का पालन करते हैं।

सरकार का यह निर्णय 'डिजिटल इंडिया' पहल के साथ भी जुड़ा हुआ है, जो कृषि आपूर्ति श्रृंखला में डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देता है। यह कदम भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप कृषि इनपुट बाजार स्थापित करने में मदद करेगा।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बायोस्टिमुलेंट पर क्यूआर कोड के सफल कार्यान्वयन के बाद, सरकार भविष्य में अन्य प्रमुख कृषि इनपुट उत्पादों, जैसे कि उर्वरक और कीटनाशकों, पर भी इसी तरह के डिजिटल सत्यापन उपाय लागू करने पर विचार कर सकती है। यह पहल देश में कृषि-व्यवसाय के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास और पारदर्शिता के एक नए युग की शुरुआत करेगी।

 

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