मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियाँ भविष्य की सबसे बड़ी
चुनौती बन सकती हैं।
तनाव, अवसाद, चिंता (एंग्जायटी) और नींद से
जुड़ी समस्याएँ पहले से ही बढ़
रही हैं। डिजिटल स्क्रीन पर अत्यधिक समय
बिताने, सामाजिक अलगाव और प्रतिस्पर्धात्मक जीवनशैली के
कारण मानसिक रोगों के मामलों में
तेज़ वृद्धि होने की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने
वाले समय में मानसिक स्वास्थ्य उपचार और काउंसलिंग की
मांग कई गुना बढ़
सकती है।
लाइफस्टाइल डिज़ीज़ जैसे मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मोटापा भविष्य
में और कम उम्र
के लोगों को प्रभावित कर
सकते हैं। फास्ट फूड, शारीरिक निष्क्रियता और अनियमित दिनचर्या
इन बीमारियों के मुख्य कारण
माने जा रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है
कि यदि खानपान और व्यायाम पर
ध्यान नहीं दिया गया, तो ये बीमारियाँ
वैश्विक स्तर पर महामारी का
रूप ले सकती हैं।
नई संक्रामक बीमारियाँ भी भविष्य में
चिंता का विषय रहेंगी।
जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई और
वन्यजीवों के संपर्क में
बढ़ोतरी से नए वायरस
और बैक्टीरिया इंसानों तक पहुँच सकते
हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं
कि भविष्य में ज़ूनोटिक रोगों (जानवरों से इंसानों में
फैलने वाली बीमारियाँ) का खतरा बढ़
सकता है, जिससे अचानक फैलने वाली महामारियाँ सामने आ सकती हैं।
एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस यानी दवाओं का असर कम
होना, आने वाले समय की एक गंभीर
समस्या बन सकता है।
दवाओं के अत्यधिक और
गलत उपयोग के कारण बैक्टीरिया
मजबूत होते जा रहे हैं।
यदि यही स्थिति रही, तो साधारण संक्रमण
भी जानलेवा साबित हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे “साइलेंट पैंडेमिक” के रूप में
देख रहे हैं।
पर्यावरण से जुड़ी बीमारियाँ भी भविष्य में
बढ़ सकती हैं। वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा,
फेफड़ों के रोग और
एलर्जी के मामले बढ़ने
की संभावना है। इसके अलावा, दूषित पानी और खाद्य पदार्थों
से पेट और त्वचा संबंधी
रोग भी आम हो
सकते हैं। गर्मी बढ़ने के कारण हीट
स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी
समस्याएँ भी गंभीर रूप
ले सकती हैं।
निष्कर्षतः,
भविष्य की बीमारियाँ केवल
चिकित्सा क्षेत्र की चुनौती नहीं
होंगी, बल्कि सामाजिक और नीतिगत मुद्दा
भी बनेंगी। समय पर जागरूकता, स्वस्थ
जीवनशैली, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक शोध
के माध्यम से ही इन
संभावित खतरों से निपटा जा
सकता है। विशेषज्ञों का मानना है
कि “रोकथाम ही सबसे अच्छा
इलाज” भविष्य की स्वास्थ्य नीति
का मूल मंत्र होगा।
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