भारत
और यूरोपीय संघ (EU) ने 27 जनवरी
2026 को
16वें भारत–EU
शिखर
सम्मेलन
(India‑EU Summit) में
एक ऐतिहासिक
Free Trade Agreement (FTA) और
रणनीतिक
सुरक्षा‑रक्षा
साझेदारी
पर समझौता किया — जिसे मीडिया और राजनीतिक नेताओं
द्वारा “मदर
ऑफ
ऑल
डील्स”
(Mother of All Deals) कहा
गया है।
यह समझौता दो दशकों से लंबित वार्ताओं का परिणाम है और दुनिया की दूसरी (EU) तथा चौथी (भारत) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को एक नए युग में ले जा रहा है।
1) मुक्त व्यापार समझौता (FTA): वैश्विक व्यापार का नया युग
लंबी वार्ता का परिणाम
FTA पर
सहमति लगभग 20 वर्षों
की
अस्थिर
चर्चाओं
के बाद मिली — वार्ताएँ लगभग 2007 में शुरू हुईं, कुछ समय के लिए रुकीं,
फिर 2022 के बाद से
फिर सक्रिय हुईं। आज इसका औपचारिक
ऐलान होना एक मील का
पत्थर है।
बाजार पहुँच और आयात‑निर्यात प्रावधान
यह
समझौता एक लगभग
2 अरब
लोगों
के बाजार को जोड़ता है,
जो लगभग वैश्विक
सकल
घरेलू
उत्पाद
(GDP) का
25% है
और विश्व
व्यापार
का
लगभग
33% हिस्सा
बनाता है।
इस
समझौते के तहत भारत
लक्ज़री
कारों
पर
शुल्क
को
110% से
कम
करके
30–35% कर
रहा
है,
और यह समय के
साथ और कम करके
10% तक लाया जाएगा। बिजली‑वाहनों (EVs) पर शुल्क कटौती
में कुछ समय की देरी होगी,
लेकिन वे भी क्रमिक
रूप से शुल्क में
कटौती तक पहुंचेंगे।
निर्यात वृद्धि के अनुमान
विशेष रूप से इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि की उम्मीद है — इस समझौते के कारण 2 वर्षों में इंजीनियरिंग निर्यात $25 बिलियन तक पहुंच सकता है।
2) भारत और EU के बीच रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी
FTA के
अलावा भारत और यूरोपीय संघ
ने Security and Defence Partnership
पर भी समझौता किया
है, जो एक अलग,
व्यापक फ्रेमवर्क बनाता है।
रणनीतिक सुरक्षा साझा ढांचा
इस
समझौते से दोनों पक्ष
समुद्री सुरक्षा, साइबर
सुरक्षा,
आतंकवाद‑रोधी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बलों
की सुदृढ़ता के लिए मिलकर
काम करेंगे। यह 2025 में शुरू हुई वार्ता का विस्तार है,
जिसमें पहले से ही कई
सेक्टर‑विशिष्ट डायलॉग शुरू हो चुके थे।
🇮🇳 भारत
की
भागीदारी:
·
पहली
बार EU‑India के बीच annual
Security and Defence Dialogue की
स्थापना हुई।
·
Maritime
security (समुद्री
सुरक्षा),
counterterrorism, साइबर
खतरों और गैर‑प्रसार
जैसे क्षेत्रों में ठोस कार्यक्रम विकसित होंगे।
·
कप्तान
स्तर पर समन्वय और
साझा अभ्यास के लिए स्थायी
ढांचा तैयार किया गया।
डिफेंस सप्लाई चेन का एकीकरण
भारतीय
रक्षा मंत्री राजनाथ
सिंह
और EU आयोग की उपाध्यक्ष काजा
कालास
के बीच सहमति बनी कि दोनों पक्ष
डिफेंस
सप्लाई
चेन
को एकीकृत करेंगे — जिससे औद्योगिक सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और उत्पादन सहयोग
को बढ़ावा मिलेगा।
यह साझेदारी Asia में भारत के खिलाफियों के साथ डीप रणनीतिक तालमेल का संकेत देती है, जो चीन‑अमेरिका के दबाव के बीच यूरोप को एक मजबूत, भरोसेमंद साझेदार भारत के रूप में देखने का संकेत देती है।
3) राजनैतिक और वैश्विक प्रभाव
वैश्विक स्थिरता का संदेश
यूरोपीय
आयोग की अध्यक्ष उर्सुला
वॉन
डेर
लेयेन
ने कहा कि भारत
और
EU के
राजनीतिक
रिश्ते
पहले
से
कहीं
अधिक
मजबूत
हैं। उन्होंने इस
समझौते को वैश्विक
अनिश्चितता
के
समय
में
सहयोग
और
संवाद
का
संदेश
बताया, जहाँ लोकतंत्र, नियम‑आधारित व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता
को बढ़ावा देना आवश्यक है।
पीयूष
गोयल, भारत के वाणिज्य और
उद्योग मंत्री, ने इसे “गेम‑चेंजिंग और ट्रांसफॉर्मेशनल” कहा — और उम्मीद जताई
कि यह 2026 के
अंत
तक
लागू
हो
जाएगा।
वैश्विक स्थिरता में भागीदारी
समझौते में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट समर्थन और हिंसक चरमपंथ का मुकाबला करने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग का भी जोर दिया गया है, जो दोनों पक्षों के व्यापक रणनीतिक एजेंडे को दर्शाता है।
4) आर्थिक और सामाजिक फायदे
🇮🇳 भारत की आर्थिक क्षमता
भारत
और EU के बीच द्विपक्षीय
व्यापार 2024‑25 में करीब $136.5 बिलियन (लगभग ₹11.5 लाख करोड़) था, जिसमें भारत का निर्यात $75.8 बिलियन
और आयात $60.7 बिलियन था।
FTA के
प्रभाव से छोटे उद्यमों,
कृषि उत्पादकों और विनिर्माण उद्योग
को भी उच्च
बाजार
पहुंच
और
प्रतिस्पर्धात्मक
लाभ
मिलने की उम्मीद है,
जिससे रोजगार के नए अवसर
उत्पन्न होंगे।
कृषि और सेवाएँ
ग्रामीण और कृषि‑आधारित व निर्यात‑उन्मुख वस्तुएँ जैसे चाय, मसाले, समुद्री भोजन और तैयार खाद्य उत्पादों के निर्यात हेतु EU में तुरंत या चरणबद्ध टैरिफ कटौती मिल सकती है, जिससे भारत के किसानों तथा छोटे व्यवसायों को वैश्विक बाजारों की ओर मार्ग मिलेगा।
5) चुनौतियाँ और चिंताएँ
🔹 समझौते
की संवैधानिक
अनुमोदन
प्रक्रिया
— इसे लागू करने हेतु EU की संसद और
भारत में घरेलू प्रक्रिया के तहत कइ̌ं
महीनों
की
विधायी
मंजूरी
आवश्यक होगी।
🔹 विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा को संतुलित करना — दोनों बाजार विशाल हैं, पर प्रतिस्पर्धा और नीति तालमेल से जुड़े मुद्दे अब भी आगे की चर्चा का विषय बने हुए हैं।
6) निष्कर्ष — रणनीतिक, आर्थिक और वैश्विक बदलाव
भारत‑EU
FTA और रक्षा साझेदारी 2026 केवल एक व्यापार
समझौता
नहीं है; यह एक वैश्विक
रणनीतिक
मोड़
है जो दोनों पक्षों
के आर्थिक, रक्षा, साइबर और सुरक्षा लक्ष्यों
को एकीकृत करता है।
इससे
केन्द्रीय रूप से:
·
वैश्विक
व्यापार
नेटवर्क
का
विस्तार
होगा।
·
निर्यात‑आयात
में
भारी
लाभ
तथा आर्थिक विकास का विस्तार संभव
है।
·
रणनीतिक
सुरक्षा‑सहयोग
में
वृद्धि
होगी, विशेष रूप से समुद्री, साइबर
और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
में।
· वैश्विक नेतृत्व का नया स्वरूप उभर रहा है जहाँ भारत और EU का संयुक्त दृष्टिकोण वैश्विक स्थिरता को समर्थन देगा।
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